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दुनिया

ऊंची फीस से सूचना मांगने वाले को डराना गलत: कोर्ट

सूचना का अधिकार कई देशों में है. सारे देशों में एक समानता है कि सरकारें सूचना देने में बहुत आनाकानी करती हैं. जर्मनी में अथाह फीस लेकर लोगों को आतंकित करने के एक मामले को अदालत ने गतल ठहराया है.

जर्मनी की सर्वोच्च प्रशासनिक अदालत ने कहा है कि सूचना स्वतंत्रता कानून का मकसद लोगों के लिए सरकारी सूचना का रास्ता खोलना था. अधिकारी इसे फीस के डंडे के सहारे न तो मुश्किल बना सकते हैं और न ही रोक सकते हैं. मामला दो पत्रकारों का है. वे सूचना स्वतंत्रता कानून की मदद से जर्मनी के गृह मंत्रालय के दस्तावेज देखना चाहते थे. ये दस्तावेज खेल संगठनों को दी गई सरकारी मदद के बारे में थे. सूचना तो दे दी गई लेकिन मंत्रालय ने एक सवाल को 66 सवालों में बांटकर 15 हजार यूरो की फीस ठोक दी. इस कानून के अनुसार एक आवेदन की फीस 500 यूरो से ज्यादा नहीं हो सकती, लेकिन अधिकारियों का कहना था जवाब जुटाने में काफी समय और धन लगा.

पत्रकारों ने इस फीस के खिलाफ अदालत में अपील की. अब संघीय प्रशासनिक अदालत ने गृह मंत्रालय द्वारा मांगी गई फीस को गलत ठहराया है और फीस को कानून के अनुसार 500 यूरो कर दिया है. दो पत्रकारों ने एक रिसर्च के सिलसिले में गृह मंत्रालय से देश में खेल और खेल संगठनों को दिए जा रहे प्रोत्साहन के बारे में सूचना मांगी थी. इस सिलसिले में उन्होंने सभी खेल संगठनों की फाइल देखनी चाही थी. इसलिए मंत्रालय ने मुख्य आवेदन को 66 आवेदनों में बांट दिया और 15 हजार यूरो की फीस मांगी.

संघीय प्रशासनिक अदालत से पहले बर्लिन की निचली प्रशासनिक अदालत और प्रांतीय प्रशासनिक अदालत ने भी फैसला सुनाया था कि आवेदन को टुकड़ों में बांटना सूचना स्वतंत्रता कानून के अनुरूप नहीं था. उस कानून में ऐसी फीस मांगने पर रोक है जिसका असर डराने वाला हो. जर्मनी में सूचना के अधिकार के लिए अदालत के इस फैसले को महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

एमजे/वीके (डीपीए)

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