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दुनिया

उम्र 11, दाखिला चाहिए एमबीबीएस में

सीएमएस में बीएससी क्लास में सुषमा अपनी साथी लड़कियों के सामने बिल्कुल नन्ही दिखती हैं. वह यहां सबसे कम उम्र की छात्रा है. यही उम्र आड़े आ गई वर्ना इस समय वह एमबीबीएस कर रही होती. इस बात का उसे अफसोस भी बहुत है.

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न्यूनतम उम्र भी पूरी न कर पाने की वजह से ही लखनऊ के छत्रपति साहू जी महाराज चिकित्सा विश्वविद्यालय ने सुषमा को एमबीबीएस में प्रवेश नहीं दिया.

सुषमा सिर्फ 11 साल की हैं. वह पूछती हैं कि अगर मेरी उम्र कम थी तो फिर प्रवेश परीक्षा के लिए प्रवेश पत्र क्यों जारी कर दिया. सुषमा का तर्क है कि जब लखनऊ विश्वविद्यालय उसे बीएससी में दाखिले की अनुमति दे सकता है तो एमबीबीएस में भी दाखिला मिलना चाहिए.

सुषमा का जन्म 7 फरवरी 2000 को रायबरेली में हुआ. उनके पिता तेज बहादुर वर्मा को अपनी इस असाधारण बेटी की प्रतिभा का तब पता चला जब उन्होंने मात्र दो साल आठ महीने में ही रामायण का पाठ कर दिया. तेज बहादुर बताते हैं कि उन्होंने सुषमा को कभी भी रामायण पढ़ने को न तो प्रेरित किया और न ही सिखाया. वह बताते हैं कि वे लोग गा बजा कर रामायण का पाठ किया करते थे उसी से सुषमा ने सीख लिया.
महज सात साल की उम्र में ही यूपी बोर्ड से हाई स्कूल परीक्षा पास करने का विश्व रिकॉर्ड बनाने पर सुषमा का नाम लिम्का वर्ल्ड बुक आफ रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज किया गया. सेंट मीरास कॉलेज की प्रिंसिपल अनीता रात्रा उनके दाखिले की घटना को बहुत दिलचस्प तरीके से बताती हैं. ‘डॉयचे वेले' को उन्होंने बताया, "जब वह आई तो मुझे लगा कि वह गलती से नर्सरी की जगह नौवीं लिख गई है. तब मैंने उसे बुलाकर पूछा तो कहा कि नहीं मुझे नौवीं में ही दाखिला चाहिए. वह बोली कि हाई स्कूल की गणित की किताब का कोई भी सवाल दे दीजिए. उसे सवाल दिया गया तो उसने बताया कि इसमें माइनस होगा तभी इसका जवाब सही आएगा."

अनीता के मुताबिक वह उसकी प्रतिभा देखकर भौंचक रह गईं. फिर प्रबंधक से कहा गया तो उन्होंने शिक्षा विभाग से विशेष अनुमति लेकर सुषमा का दाखिला कर लिया. इसी स्कूल से सुषमा ने हाई स्कूल किया और 10 साल 6 महीने की उम्र में इंटर किया. यहीं रहकर उन्होंने सीपीएमटी पास किया. इस स्कूल के प्रबंधक ने एक क्लास रूम (कमरा) सुषमा के परिवार को दे दिया है जिसमें तेज बहादुर का परिवार रहता है. यहां से सुषमा को 2500 रुपये महीना वजीफा भी मिलता है.
पिछले मंगलवार को लखनऊ विश्वविद्यालय ने सुषमा को बीएससी जीव विज्ञान में दाखिले की इजाजत दे दी तो वह एक बार फिर सुर्खियों में आ गईं. सीएमएस की प्रिसिंपल विनीता कामरान बताती हैं कि वह वाकई विलक्षण लड़की है. लखनऊ विश्विद्यालय से काफी कोशिश के बाद वह उसे इजाजत दिला पाई हैं . कामरान बताती हैं कि कई बार उन्हें प्रवेश समिति को समझाना पड़ा.

कामरान नहीं मानतीं कि इस सफलता के चक्कर में सुषमा का बचपन कहीं गुम हो गया. वह कहती हैं कि सुषमा इतनी सक्षम है कि बचपन का भी लुत्फ ले रही हैं और कुछ बनने का जुनून भी पूरा कर रही है.

सुषमा ने 'डॉयचे वेले' से कहा कि वह डॉक्टर बनना चाहती हैं. बचपन से उनकी यही इच्छा है. नन्ही सुषमा के लिए बचपन का मतलब होश संभालने से है.सुषमा का बड़ा भाई भी उससे दो हाथ आगे है . वह 15 वर्ष की उम्र में कम्प्यूटर की डिग्री हासिल कर चुका है. वह भी लिम्का बुक में अपना नाम दर्ज करा चुका है. पिता तेज बहादुर को नहीं पता कि रात भर इंटरनेट पर वह क्या करता है. बस दिन भर सोता है और किसी से मिलता जुलता नहीं है. तेज बहादुर को इस बात का जरा भी मलाल नहीं है कि सरकार उसके परिवार के लिए कुछ नहीं कर रही है.

रिपोर्टः लखनऊ से सुहेल वहीद

संपादनः वी कुमार

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