उम्मीद से बेहतर रही बातचीत: पाकिस्तान | जर्मन चुनाव 2017 | DW | 30.04.2010
  1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

जर्मन चुनाव

उम्मीद से बेहतर रही बातचीत: पाकिस्तान

भारत और पाकिस्तान के प्रधानमंत्रियों में हाल ही में हुई बैठक को पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच अविश्वास पाटने की दिशा में अच्छा प्रयास बताया है. पाकिस्तान ने कहा है कि द्विपक्षीय बातचीत अपेक्षाओं से बढ़ कर साबित हुई.

default

पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने आगाह भी किया है कि अविश्वास को दूर करने के लिए और प्रयास किए जाने की ज़रूरत है. थिम्पू में मनमोहन सिंह और यूसुफ़ रज़ा गिलानी के बीच सार्क बैठक के दौरान बातचीत हुई. इस मुलाक़ात के एक दिन बाद क़ुरैशी ने कहा कि वह भारतीय विदेश मंत्री एसएम कृष्णा के साथ बजट सत्र की समाप्ति के बाद जल्द से जल्द संपर्क करना चाहेंगे ताकि वार्ता को आगे बढ़ाया जा सके. भारत में संसद का बजट सत्र 7 मई को समाप्त हो रहा है.

Pakistan Außenminister Shah Mehmood Qureshi

भारत के साथ वार्ता पर अपनी राय देते हुए क़ुरैशी ने कहा, "बातचीत उम्मीदों से कहीं बेहतर रही. यह सही दिशा में उठाया गया एक क़दम है, ठोस प्रयास है और हम इसे आगे ले जाना चाहेंगे. इस बात में कोई संदेह नहीं कि भारत और पाकिस्तान के बीच अविश्वास है लेकिन भरोसा पैदा करने वाले फ़ैसले लेकर हमें इसी दूरी को पाटना है." क़ुरैशी के मुताबिक़ इस अविश्वास को एक बैठक के ज़रिए नहीं दूर किया जा सकता बल्कि इसके लिए प्रक्रिया को जारी रखने की ज़रूरत है.

पाकिस्तान अब तक ठप पड़ी समग्र बातचीत प्रक्रिया को शुरू करने की मांग करता रहा है लेकिन अब संकेत मिल रहे हैं पाकिस्तान इस मांग को त्याग सकता है. क़ुरैशी ने कहा है कि पाकिस्तान ने बातचीत को शुरू करने की इच्छा जताई है क्योंकि सही क़दम यही है.

भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी के बीच हुई बैठक में दोनों नेताओं ने वार्ता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई थी और शांति प्रक्रिया को फिर शुरू करने पर सहमति जताई जिसमें हर मुद्दे पर बातचीत की जाएगी.

कु़रैशी का कहना है कि फ़रवरी में विदेश सचिव स्तर की वार्ता के दौरान भारत ने सिर्फ़ आतंकवाद पर बात की लेकिन अब भारत अपने रुख़ में बदलाव ला रहा है.

पाकिस्तान के मुताबिक़ अमेरिका जैसे देश सिर्फ़ सलाह दे सकते हैं और भारत और पाकिस्तान को बातचीत के लिए कह सकते हैं लेकिन मतभेदों को दूर करने के लिए दबाव नहीं बना सकते.

रिपोर्ट: एजेंसियां/एस गौड़

संपादन: ओ सिंह

संबंधित सामग्री