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दुनिया

उभरते बाजारों की मंदी से मुश्किल

अर्थव्यवस्थाओं में धीमा होता विकास और अमेरिकी कर्ज की सीमा का खतरनाक स्तर तक पहुंचना दुनिया की अर्थव्यवस्था को मंदी से निकलने में बाधा डाल सकता है. आर्थिक सहयोग और विकास संगठन, ओईसीडी ने मंगलवार को यह चेतावनी दी.

अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संगठन, ओईसीडी ने दुनिया के लिए आर्थिक संभावनाओँ की नई रिपोर्ट जारी की है. इसमें कहा गया है कि 2014 और 2015 में विकसित देशों का विकास पूर्वानुमान की तुलना में बढ़ेगा लेकिन चीन, भारत और ब्राजील के साथ ही दूसरी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के विकास में कमी आएगी.

अमेरिकी अर्थव्यवस्था में इस साल 1.7 फीसदी विकास का अनुमान लगाया गया है. इससे पहले मई में इसके 1.9 फीसदी रहने की बात कही गई थी जबकि 2014 के लिए इसकी दर 2.9 फीसदी रहने की बात कही जा रही है. जाहिर है कि मौजूदा दर अगली और पिछली दोनों दरों से कम है.

चीन का विकास दर 2013 में 7.7 फीसदी और 2014 में 8.2 फीसदी रहने का अनुमान है. ओईसीडी ने इससे पहले इनके 7.8 और 8.4 फीसदी रहने का अनुमान लगाया था. भारत और ब्राजील के अनुमानों में तो और कमी आई है. भारत की जीडीपी 2013 में 3.4 और 2014 में 5.1 फीसदी बढ़ने का अनुमान लगाया गया है. इससे पहले यह अनुमान 5.7 और 6.6 फीसदी था. इसी तरह ब्राजील का विकास इस साल के लिए 2.5 फीसदी और अगले साल के लिए 2.2 फीसदी रहने का अनुमान है.

इस बीच यह तय है कि यूरोजोन की मंदी से निकलने की दर बहुत धीमी ही रहेगी. 2013 के 0.4 फीसदी की तुलना में इस साल यह दर 1 फीसदी रहने की उम्मीद जताई गई है. उभरती अर्थव्यवस्थाओं ने दुनिया की अर्थव्यवस्था को 2008-09 की वैश्विक मंदी के संकट से निकालने में मदद की. हालांकि मौजूदा दौर में इन देशों के विकसित अर्थव्यवस्थाओं के उबरने में बाधा बनने की बात कही जा रही है. ओईसीडी के मुख्य अर्थशास्त्री पीयर कार्लो पाडोन ने रिपोर्ट जारी करने से पहले यह बातें कही.

पाडोन ने उभरते बाजारों में इस साल गर्मियों में आई गिरावट की ओर इशारा किया जो इस बात से शुरू हुई थी कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व चीन, ब्राजील और भारत जैसे बाजारों से संपत्ति खरीदना कम कर सकता है. ओईसीडी का कहना है कि सच्चाई यह है कि अमेरिका एक "बहुत बड़े आर्थिक संकट" की कगार पर पहुंच गया था जिसकी वजह से अक्टूबर में दो महीने तक अमेरिकी सरकार को बंदी का भी सामना करना पड़ा और इससे "भरोसा हिल" गया. पाडोन ने चेतावनी दी है, "यह प्रकरण बड़ी आसानी से दोहराए जा सकते हैं, बल्कि आने वाले समय में और ज्यादा विस्तार से भी यह संभव है."

इधर, यूरोजोन पिछले कुछ सालों की तुलना में इस साल कम जोखिम झेल रहा है. हालांकि यूरो मुद्रा वाले 17 देशों में बेरोजगारी की दर अब भी बहुत ऊंची रहने की आशंका है और इस क्षेत्र के बैंकों की स्थिति अब भी नाजुक है. ओईसीडी ने सलाह दी है, "इससे बचने के लिए एक बैंकिंग यूनियन की सख्त जरूरत है."

एनआर/एजेए (डीपीए)

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