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दुनिया

उत्तर कोरिया से लौटे अमेरिकी छात्र की मौत पर रहस्य गहराया

अमेरिकी राष्ट्रपति ने अमेरिकी छात्र ओटो वार्मबियर की मौत के लिए प्योंगयांग के "क्रूर शासन" की निंदा की. 17 महीने तक कैद में रखने के बाद इस छात्र को एक हफ्ते पहले ही कोमा की स्थिति में उत्तर कोरिया ने वापस भेजा था.

गंभीर मस्तिष्क आघातों से प्रभावित 22 साल के अमेरिकी छात्र वार्मबियर को एक हफ्ते पहले ही मेडिकल कारणों से उत्तर कोरिया से वापस अमेरिका लाने में कामयाबी मिली थी. परिवार और संबंधियों से घिरे रह कर केवल छह दिन बिताने के बाद ही अपने पैतृक शहर सिनसिनाटी, ओहायो में उसने दम तोड़ दिया. परिवार ने कहा, "उत्तर कोरिया के हाथों इतनी अधिक प्रताड़ना झेलने के बाद हमारे बेटे का कोई और अंजाम हो भी नहीं सकता था." वार्मबियर अपने दोस्तों के साथ उत्तर कोरिया घूमने के लिए गया था. उसी ट्रिप में उसे गिरफ्तार किया गया और मार्च 2016 में उसे 15 साल सश्रम कारावास की सजा सुनायी गयी. उस पर एक होटल से एक राजनीतिक पोस्टर चुराने का आरोप सिद्ध हुआ था. अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने एक लिखित बयान में लिखा, "ओटो का जो हाल हुआ उससे मेरे प्रशासन का यह दृढ़ निश्चय और मजबूत हुआ है कि मासूम लोगों को हम ऐसे संकट से बचाएं और ऐसे शासनों से भी जो बुनियादी मानव गरिमा का भी सम्मान नहीं करते."

अमेरिका से आयी कई महत्वपूर्ण लोगों की सख्त प्रतिक्रिया के अलावा उत्तर कोरिया के चिर प्रतिद्वंद्वी दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे-इन का कहना है कि अमेरिकी छात्र की मौत के लिए उत्तर कोरिया को ही जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए.

उत्तर कोरिया के मिसाइल और परमाणु परीक्षणों यहां तक की सैनिक परेडों तक को बढ़ा चढ़ा कर पेश करने के पीछे देश का मकसद साफ है. लेकिन अमेरिकी छात्र के साथ वहां जो हुआ उसका कोई तर्क नहीं सूझ रहा है. सोल की योनसाई यूनिवर्सिटी के एशिया विशेषज्ञ जॉन डेलुरी कहते हैं, "ओटो वार्मबियर के साथ जो हुआ, वो उत्तर कोरिया के आम स्तरों की सीमा से बाहर है." डेलुरी कहते हैं कि "इसकी जोरदार प्रतिक्रिया होनी चाहिए. अमेरिकी सरकार केवल यह कह हाथ नहीं उठा सकती कि उत्तर कोरिया तो ऐसा ही है."

वार्मबियर के साथ क्या हुआ इसका शायद ठीक ठीक कभी पता ना चले. लेकिन कुछ सुराग और ढेर सारी अटकलें जरूर हैं. इस महीने की शुरुआत में ही न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में उत्तर कोरियाई राजनयिकों ने अचानक अमेरिकी अधिकारियों से मिलने की इच्छा जतायी. इस वार्ता में ही अमेरिका को वार्मबियर की स्थिति के बारे में पता चला. उसके परिवार को यह पता चला कि मार्च 2016 में सजा सुनाये जाने के कुछ ही दिन बाद फूड प्वाइजनिंग के साथ साथ नींद की गोली लेने के कारण वह कोमा में चला गया. हालांकि अमेरिका लाये जाने के बाद हुई जांच में डॉक्टरों को फूड प्वाइजनिंग या किसी तरह की पिटाई के भी कोई सबूत नहीं मिले थे. उन्हें गहरी दिमागी चोट के सबूत मिले लेकिन यह नहीं पता चला कि वह हुआ कैसे होगा.

यह भी संभावना जतायी जा रही है कि उत्तर कोरिया को इसकी बहुत चिंता ही नहीं कि वार्मबियर जैसे मामलों से उसके अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर कोई असर पड़ेगा. देश का राज चलाने वाले किम वंश के नेता पहले भी ऐसे संकेत देते आये हैं कि उसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के ऐतराज और पाबंदियों की कोई फिक्र नहीं है. देश की जेलों में खुद उत्तर कोरिया के ही हजारों नागरिक बुरे हालातों में बंद रखे गये हैं. उत्तर कोरिया के रूढ़िवादी नहीं चाहते कि उत्सुक अमेरिकी टूरिस्ट उनके देश के नागरिकों से बातें करें और उनके दशकों से फैलाये प्रोपेगैंडा का पर्दाफाश करें कि वे दुनिया में सब उत्तर कोरिया के अच्छे हाल से ईर्ष्या करते हैं.

आरपी/एमजे (एपी, एएफपी)

 

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