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दुनिया

उठ खड़े हों एक अरब

महिलाओं के अधिकार के लिए पूरी दुनिया में एक गुरुवार को प्रदर्शन हो रहे हैं, जिसमें एक अरब लोगों के शामिल होने की उम्मीद है. इसमें भारत अग्रणी है, जहां बलात्कार कांड के बाद से महिलाओं की स्थिति पर बहस हो रही है.

दुनिया भर के लगभग 200 देशों में भीड़ जुटाने, गाना गाने, डांस करने और लोगों को जागरूक करने की मुहिम है. इसके लिए वैलेंटाइंस डे को चुना गया है और अपील की जा रही है कि महिलाओं के खिलाफ हिंसा खत्म हो.
दिल्ली में प्रदर्शनकारियों ने कहा है कि वे इस मौके का इस्तेमाल करके सरकार पर दबाव बनाएंगे कि वह महिलाओं की सुरक्षा के लिए ज्यादा कदम उठाए. बलात्कार कांड के बाद दिल्ली में लोगों ने बढ़ चढ़ कर धरना प्रदर्शन में हिस्सा लिया था.
दक्षिण एशिया में इस कैंपेन को चला रहीं कमला भसीन ने कहा, "हमारा कार्यक्रम कॉलेजों में शुरू हो चुका है और मैं महिला टैक्सी ड्राइवरों के साथ जाकर प्यार के इजहार वाले दिन में समानता का संदेश फैलाऊंगी."
प्रदर्शन और मोमबत्ती मार्च के अलावा भारत में धमाकेदार "ओपन ड्रम सर्किल" की भी योजना है, जिसमें जोर जोर से नगाड़े बजाए जाएंगे. मुंबई के सागर में पितृसत्तात्मक समाज और महिलाओं के प्रति नफरत की सांकेतिक रूप से "क्रिया कर्म" कर दी जाएगी.


चर्चित नाटक द वजीना मोनोलॉग लिखने वाली एवा एंसलर ने यह कंसेप्ट तैयार किया है और सिंगापुर तथा सिडनी जैसे शहरों में इसकी अच्छी शुरुआत रही. कैंपेन के तहत दुनिया भर के एक अरब लोगों से कहा जा रहा है कि वे दुनिया की एक तिहाई महिला आबादी यानी एक अरब महिलाओं के लिए उठ खड़े हों. ये ऐसी महिलाएं हैं, जो हिंसा या बलात्कार की शिकार हैं.
इस कैंपेन में सितार वादक रविशंकर की बेटी अनुष्का शंकर भी शामिल हो रही हैं, जिन्होंने गुरुवार को एक वीडियो जारी कर कहा है कि बचपन में उनके साथ भी यौन शोषण हो चुका है और परिवार के एक मित्र ने ऐसा किया.
अमेरिकी संगीतकार अनुष्का ने अपना संदेश दिल्ली बलात्कार कांड की पीड़ित महिला को श्रद्धांजलि के रूप में पेश किया, जिसकी सिंगापुर के एक अस्पताल में मौत हो गई थी. अनुष्का ने कहा, "बहुत हो चुका. मैं उठ रही हूं. मैं अपने देश की महिलाओं के साथ उठ रही हूं."
सिंगापुर में जमा लोगों ने शानदार प्रदर्शन किया. एक भीड़ भाड़ वाले मॉल में सीटी की आवाज आते ही लोग थम गए. एक मिनट तक मूर्ति बने रहने के बाद उन्होंने जोर लगाकर कहा, "चिल्लाओ. यौन उत्पीड़न को भगाओ."
एजेए/ओएसजे (एएफपी)

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