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दुनिया

उचित नहीं एनजीओ का बजट घटाना

यूरोप शरणार्थी संकट से गुजर रहा है और साफ साफ दिख रहा है कि उसे समझ में नहीं आ रहा कि उससे कैसे निबटना है. अब तक 6 लाख से ज्यादा लोग समुद्र के रास्ते यूरोप पहुंचे हैं और यूरोपीय देशों में हर दिन कोई नई बहस हो रही है.

अंतरराष्ट्रीय आप्रवासन संस्था का अनुमान है कि यूरोप आने की कोशिश में इस साल 3,100 से ज्यादा लोग या तो मारे गए हैं या लापता हैं. यूनिसेफ का मानना है कि सीरिया में जारी संघर्ष के कारण और लोग यूरोप की ओर रुख करेंगे. शरणार्थी संकट से निबटने के लिए विभिन्न देशों में अलग अलग प्रतिक्रिया हुई है. आम तौर पर सरकारों ने नहीं बल्कि गैर सरकारी संस्थाओं ने युद्ध की विभीषिका से भाग रहे शरणार्थियों को पहली मदद पहुंचाई है. उन्होंने शरणार्थियों को खाना, पानी, और स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने के अलावा उन्हें स्थानीय भाषा सिखाने में भी मदद दी है. इसके अलावा वे यूरोपीय संघ से शरणार्थियों के प्रति असहिष्णुता से निबटने की भी वकालत कर रहे हैं.

यूरोपीय संघ के सदस्य देशों की सरकारों की प्रतिक्रिया पर्याप्त नहीं रही है. हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओरबान ने सख्त रुख अपनाया है तो दूसरे राजनेताओं ने गंभीर मतभेद दिखाए हैं. जर्मन चांसलर अंगेला मैर्केल ने उम्मीद की किरण दिखाई है और शरणार्थियों का स्वागत करती दिखी हैं, लेकिन उन्हें अपनी पार्टी के अंदर और बाहर भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है. जर्मन सरकार का आकलन है कि इस साल 10 लाख शरणार्थी जर्मनी आएंगे जबकि यूरोपीय संघ ने पिछले दिनों करीब सवा लाख शरणार्थियों को सदस्य देशों के बीच बांटने का फैसला लिया है.

ब्रिटेन ने इस साल 4,000 और अगले पांच साल में 20,000 शरणार्थियों को लेने का आश्वासन दिया है. हालांकि वह उन देशों में शामिल है जिन्होंने कोटा सिस्टम में शामिल होने से मना कर दिया है. इतना ही नहीं ब्रिटिश वित्त मंत्री जॉर्ज ऑसबॉर्न ने कहा है कि शरणार्थियों की मदद के लिए अंतरराष्ट्रीय विकास सहायता विभाग के बजट से धन लिया जाएगा. यह विभाग गरीब देशों को विकास सहायता देता है और मलेरिया से होने वाली मौतों को रोकने, बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य में सुधार, ढांचागत विकास, मानवीय सहायता और नागरिक समाज की मदद में हर साल 12 अरब पाउंड खर्च करता है.

शरणार्थी संकट से निबटने के लिए गैर सरकारी संगठनों द्वारा किए जा रहे काम को देखते हुए विकास सहायता को दूसरी तरफ ले जाने का कोई तुक नहीं है. खासकर ऐसे समय में जब संयुक्त राष्ट्र द्वारा तय सस्टेनेबल विकास के लक्ष्य को पूरा करने के लिए अतिरिक्त संसाधनों की जरूरत होगी. ब्रिटेन को शरणार्थियों की मदद के लिए घरेलू बजट से बंदोबस्त करना चाहिए. सिविल सोसायटी संगठनों की चिंता यह है कि मौजूदा शरणार्थी संकट के विशाल पैमाने और बजट अनुशासन की जरूरत को देखते हुए दाता देश विकास सहायता की धनराशि का वैकल्पिक इस्तेमाल कर सकते हैं.

इसके अलावा गैर सरकारी संगठनों के लिए अनुदान कम करना गलत परिपाटी कायम कर सकता है. पहले से ही इस बात की चर्चा है कि स्वीडन की सरकार विकास सहायता बजट को शरणार्थी स्वागत बजट के रूप में इस्तेमाल करना चाहती है. ऐसे समय में जब गैर सरकारी संगठन बढ़ते काम के कारण बजट की कमी से जूझ रहे हैं, कोष को दूसरी तरफ ले जाना उनके लिए अच्छा नहीं होगा.

टेल्डा मावारीर (आईपीएस)

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