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दुनिया

उग्र कदम नहीं उठाएंगे हम: आरएसएस, वीएचपी

राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद ने अयोध्या केस के फैसले पर नरम रुख अपनाने का वादा किया है. आरएसएस और वीएचपी के नेताओं ने कहा कि कोई भड़काऊ या हिंसक कदम नहीं उठाया जाएगा. इस वादे ने सरकार को खासी राहत दी है.

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विवादित जमीन पर किसका हक है, इसका फैसला इलाहाबाद हाईकोर्ट 24 सितंबर को करेगा. 1992 में अयोध्या को लेकर उग्र रास्ता अपनाने वाले हिंदू उग्रपंथी संगठन इस बार उत्तेजित कदम न उठाने का वादा कर रहे हैं. गुरुवार को आरएसएस और वीएचपी के नेताओं की मुलाकात हुई. वीएचपी के अध्यक्ष अशोक सिंघल और महासचिव प्रवीण तोगड़िया ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से मुलाकात की.

इस बैठक के बाद नई दिल्ली में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा, ''हमारी तरफ से कोई झंझट नहीं होगा.''

आरएसएस के एक अन्य वरिष्ठ नेता ने कहा, ''अगर फैसला हमारे खिलाफ भी आता है तो कोई उग्र कदम नहीं उठाया जाएगा. हम अदालत के फैसले का सम्मान करेंगे और भविष्य में उठाए जाने वाले कदमों पर विचार करेंगे.''

वीएचपी और आरएसएस ने संकेत दिए हैं कि अगर फैसला उनके खिलाफ आता है तो वह संसद का रुख करेंगे. सरकार से मांग करेंगे कि कानून बनाकर अयोध्या में मंदिर बनाया जाए. आरएसएस प्रवक्ता राम माधव ने कहा, ''हम सीधे सरकार का रुख करेंगे और अध्यादेश के जरिए मंदिर बनाने की मांग करेंगे.''

आरएसएस और वीएचपी के अलावा मुस्लिम संगठनों ने भी लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है. शिया धार्मिक नेता मौलाना कल्बे जव्वाद, ईदगाह के नायब इमाम और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना खालिद रशीद फिरंगीमहली समेत कई धार्मिक नेताओं ने अदालत के फैसले का सम्मान और शांति बनाए रखने की अपील की है. दारुल उलूम देवबंद से भी इसी तरह की अपील जारी की गई है. मुस्लिम धार्मिक नेताओं ने लोगों से कहा है कि सौहार्द बनाएं रखें ताकि स्वार्थी तत्व हालात का फायदा न उठा सकें.

रिपोर्ट: पीटीआई/ओ सिंह

संपादन: वी कुमार

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