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दुनिया

उग्रवादियों को खोजता अल्जीरिया

सेना ने 100 विदेशी नागरिकों और 573 अल्जीरियाई बंधकों को छुड़ा लिया है. आतंकवादियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में कुछ बंधकों की मौत भी हुई है. जापान ने अल्जीरिया की कार्रवाई पर नाराजगी जताई है तो अमेरिका ने कड़ा संदेश दिया.

अपहर्ताओं का कहना है कि सेना की कार्रवाई में 34 बंधक मारे गए. अल्जीरिया की सुरक्षा एजेंसियों ने इस दावे का खंडन किया है, लेकिन रिपोर्टें हैं कि सैन्य कार्रवाई में जापान के कुछ नागरिकों की मौत हुई है. इन रिपोर्टों के बाद जापान के विदेश मंत्रालय ने अल्जीरिया के राजदूत को तलब किया और सफाई मांगी. बंधक संकट के चलते जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने इंडोनेशिया का दौरा बीच में ही रोक दिया. एबे आनन फानन में टोक्यो लौटे. जापान सरकार ने अल्जीरिया से पूछा है कि बंधक संकट को हल करने के लिए कमांडो कार्रवाई से पहले उसे जानकारी क्यों नहीं दी गई.

बंधक संकट

अल्जीरिया का अमेनास गैस प्लांट नॉर्वे की कंपनी श्टाटऑयल, ब्रिटेन की बीपी और अल्जीरिया की सरकारी कंपनी सोनाट्रैच का साझा उपक्रम है. जापानी कंपनी जेजीसी प्लांट चलाने का काम करती है. प्लांट आमेनास से 40 किलोमीटर दूर टिगाट्यूराइन में है. प्लांट साल भर में नौ अरब घन मीटर गैस उत्पादन करती है. जापानी कंपनी जेजीसी के प्लांट में 78 कर्मचारी हैं. 17 की सूचना मिल चुकी है, जिनमें 10 जापानी नागरिक हैं.

सहारा के रेगिस्तान में लीबिया की सीमा से सटे अल्जीरियाई इलाके में बंधक संकट बुधवार को शुरु हुआ. अल कायदा से जुड़े हथियारबंद उग्रवादी भारी तादाद में प्लांट में घुसे और ज्यादातर कर्मचारियों को बंधक बना लिया. अल्जीरिया की सुरक्षा एजेंसियों ने गुरुवार को ही उग्रवादियों के खिलाफ कमांडो कार्रवाई शुरू कर दी. शुक्रवार सुबह दावा किया कि बंधक संकट खत्म हो चुका है, हालांकि बाद में यह कहा गया कि कुछ कर्मचारी अब भी अपहर्ताओं के कब्जे में हैं.

सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों के हवाले से समाचार एजेंसी एएफपी ने लिखा है कि गुरुवार को कई जमीनी और हवाई कार्रवाई में 18 अपहर्ता मारे गए हैं. सूत्रों के मुताबिक 30 से ज्यादा अपहर्ता अब भी प्लांट में मौजूद हैं. शुक्रवार शाम अल्जीरिया की सरकारी एपीएस न्यूज एजेंसी ने जानकारी दी कि 100 विदेशियों और 573 अल्जीरियाई नागरिकों को आजाद करा लिया गया है. 30 विदेशियों लापता बताए जा रहे हैं.

Gasfeld Algerien Geiselnahme

अमेनास गैस प्लांट

विदेशों में हलचल

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन के मुताबिक उनके कई नागरिकों की जान अब भी 'जोखिम' में है. शुक्रवार को संसद में ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने कहा, "बीती रात जोखिम में फंसे नागरिकों की संख्या 30 से कम थी. शुक्र है कि अब हम जानते हैं कि इस संख्या और कमी आई है."

अमेरिका के रक्षा मंत्री लियोन पैनेटा भी इस वक्त लंदन में हैं. पैनेटा ने ब्रिटिश अधिकारियों के साथ अल्जीरिया के मुद्दे पर बातचीत की. अमेरिका का कहना है कि उसके अधिकारी भी लगातार कार्रवाई पर नजर बनाए हुए हैं. पैनेटा ने कड़े लफ्जों का इस्तेमाल करते हुए कहा, "आतंकवादियों को यह बात पता चलनी चाहिए कि उन्हें कोई सुरक्षित जगह, शरण नहीं मिलेगी. न ही अल्जीरिया में, न ही उत्तरी अफ्रीका में और कहीं और भी नहीं." नॉर्वे के आठ नागरिकों का अब भी कोई सुराग नहीं मिला है. कुछ फ्रांसीसी नागरिकों के बारे में भी जानकारी नहीं मिली है.

बंधक संकट की शुरुआत 16 जनवरी को एक बस हमले से हुई. प्लांट के कर्मचारियों को लेकर एक बस अमेनास एयरपोर्ट जा रही थी. प्लांट से तीन किलोमीटर दूर उग्रवादियों ने बस को घेर लिया. बस को सुरक्षा दे रहे पुलिस दल और उग्रवादियों के बीच मौके पर फायरिंग शुरू हो गई. एक ब्रिटिश और एक अल्जीरियाई नागरिक समेत आठ लोगों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई. घायलों को लेकर बस किसी तरह अमेनास पहुंची. इसके बाद तीन गाड़ियों में सवार उग्रवादी गैस प्लांट पहुंच गए. घातक हथियारों से लैस उग्रवादी प्लांट कर्मचारियों के रिहाइशी इलाके में घुसे और लोगों को बंधक बनाते चले गए.

Algerien Geiselnahme

अपहर्ताओं ने आरोप भी लगाए और मांग भी रखी

कौन हैं हमलावर

गुरुवार सुबह अल्जीरिया की सेना ने कमांडो कार्रवाई का फैसला किया. प्लांट में चुनिंदा जगहों पर हेलिकॉप्टर से हमले किये गए. कमांडो दस्ते ने जमीनी कार्रवाई भी शुरू की. पुलिस ने हमले के पीछे कुख्यात उग्रवादी संगठन मोख्तार बेलमोख्तार का हाथ होने की आशंका जताई है. यह संगठन 1980 में अफगानिस्तान में सोवियत सेनाओं के खिलाफ जंग लड़ चुका है.

हाल ही में संगठन कमजोर हुआ और अल कायदा से जुड़ गया. अपहर्ता मोबाइल फोन से मीडिया से संपर्क भी कर चुके हैं. उनका कहना है कि माली में अल कायदा के खिलाफ फ्रांस की सैन्य कार्रवाई के विरोध में उन्होंने यह हमला किया है. अल्जीरिया ने फ्रांस के लड़ाकू विमानों को अपने हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल करने की इजाजत दी. अपहर्ताओं ने अल्जीरिया पर माली के विस्थापितों को शरण न देने का आरोप भी लगाया है. उग्रवादियों ने अल्जीरिया की जेल में बंद दर्जनों कट्टरपंथियों की रिहाई की मांग भी की है.

ओएसजे/एजेए (एएफपी, रॉयटर्स)

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