ईरान वार्ता और यूक्रेन का साया | दुनिया | DW | 17.03.2014
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दुनिया

ईरान वार्ता और यूक्रेन का साया

पश्चिमी देशों और ईरान के बीच परमाणु मुद्दे पर अगले दौर की बातचीत वियना में शुरू हो रही है. अमेरिका ने भरोसा जताया कि यूक्रेन की वजह से इस पर असर नहीं पड़ेगा. रूस का बाकी के देशों से यूक्रेन मुद्दे पर विवाद चल रहा है.

अब तक सकारात्मक रही बातचीत में ईरान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांचों स्थायी सदस्यों के अलावा जर्मनी के साथ चर्चा में शामिल है. वियना में इस दौर की बैठक में बात होगी कि ईरान के किन कदमों के बाद उस पर से और प्रतिबंध हटाने शुरू किए जाएं.

यूएन सुरक्षा परिषद में रूस भी शामिल है, जो यूक्रेन के मुद्दे पर पश्चिमी देशों के रुख से अलग रुख अपनाए हुए है. हालांकि अमेरिका का मानना है कि इसकी वजह से ईरान की बातचीत पर असर नहीं पड़ेगा. समाचार एजेंसियों ने ईरान वार्ता से जुड़े अमेरिकी अधिकारी का नाम लिए बगैर उनका बयान चलाया है, "हमें उम्मीद है कि यूक्रेन के मुश्किल हालात का असर इस बातचीत पर नहीं पड़ेगा. हमें आशा है कि यूक्रेन के मुद्दे पर हम या रूस जो भी कदम उठाते हैं, उससे इस वार्ता का लेना देना नहीं."

ईरान वाली बातचीत पिछले साल शुरू हुई है, जिसमें अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी एकजुट हैं. अमेरिकी अधिकारी का कहना है, "वहां एक बहुत अच्छा माहौल है. हालांकि कुछ मतभेद भी हैं लेकिन हम उन्हें सही ढंग से पाटने की कोशिश करते हैं." अब तक की बातचीत के आधार पर ईरान ने अपने कुछ परमाणु कार्यक्रम छह महीने के लिए रोक दिए हैं, जिसके बाद संयुक्त राष्ट्र और पश्चिमी देशों ने भी पाबंदी में ढील दी है.

इस्राएल और पश्चिमी देशों का दावा है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की राह पर है. जबकि ईरान इस बात से इनकार करता आया है. उसका कहना है कि वह बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए अपना कार्यक्रम चला रहा है. इस दिशा में अमेरिका, संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ ने उस पर प्रतिबंध भी लगाए लेकिन इसका कोई खास असर नहीं हुआ. अब बातचीत चल रही है, जिसके लिए सभी पक्षों ने 10 जुलाई तक का वक्त तय किया है.

उधर, रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने लंदन में अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी से मुलाकात के बाद बताया कि पश्चिमी देशों के साथ "एक राय नहीं बन" रही है. केरी ने रूस को चेतावनी दी है कि अगर सोमवार तक मॉस्को अपनी सेनाओं को क्रीमिया से नहीं हटाता है, तो इसके "बहुत भयंकर" परिणाम हो सकते हैं. हालांकि रूस अपनी सेनाओं की संख्या में लगातार इजाफा करता जा रहा है.

एजेए/एएम (एएफपी, रॉयटर्स)

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