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ईरान में परमाणु ऊर्जा संयंत्र में ईंधन भरना शुरू

अंतरराष्ट्रीय दबाव और पाबंदियों को दरकिनार कर ईरान ने अपने पहले परमाणु ऊर्जा संयंत्र में ईंधन भरने का काम शुरू कर दिया है. रूस ने बनाया परमाणु पावर स्टेशन और ईंधन की आपूर्ति भी वहीं से होगी. अमेरिका ने रूस की आलोचना की.

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बुशहर शहर के पास स्थित इस संयंत्र ईंधन भरने की तस्वीरें टेलीविजन पर दिखाई गई हैं. ईरान के परमाणु मामलों के प्रमुख अली अकबर सलेही और उनके रूसी सहयोगी रिएक्टर में ईंधन के भरे जाने की क्रिया पर नजर रख रहे हैं. सलेही ने एक पत्रकार वार्ता में कहा, "पश्चिमी देशों के दबावों, प्रतिबंधों और मुश्किलों के बावजूद हम ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम के सबसे बड़े प्रतीक की शुरुआत को देख रहे हैं." बुशहर परमाणु पावर स्टेशन ईरान अपने लिए बेहद अहम मान रहा है क्योंकि इससे कोयले और अन्य जीवाश्म ईंधन पर उसकी निर्भरता कम होगी. परमाणु ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ा कर ईरान तेल और गैस के निर्यात को बढ़ाना चाहता है.

ईरान को उम्मीद है कि अगले दो तीन महीनों में बुशहर में बिजली का उत्पादन शुरू हो सकेगा और इससे 1000 मेगावॉट बिजली पैदा होगी. यह ईरान की बिजली जरूरत का 2.5 फीसदी है.

इस पावर स्टेशन के डिजाइन और निर्माण में रूस ने मदद की है. रूस ही ईंधन की आपूर्ति करेगा. परमाणु प्रसार के मुद्दे पर चिंताओं को दूर करने के लिए रूस इस्तेमाल में लाई जा चुकी छड़े वापस ले लेगा क्योंकि उससे प्लूटोनियम बनाया जा सकता है. ये प्लूटोनियम परमाणु हथियार विकसित करने के काम में आता है. परमाणु कार्यक्रम के मुद्दे पर ईरान के रुख से नाराज अमेरिका रूस की भी आलोचना कर रहा है.

No Flash Iran Atom Präsident Mahmud Ahmadinedschad

इस्राएल ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम का कड़ा विरोध किया.

हालांकि अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता डार्बी हॉलेडे के मुताबिक अमेरिका इस रिएक्टर को परमाणु प्रसार के खतरे के नजरिए से नहीं देख रहा है. इसकी एक बड़ी वजह यह है कि रूस ईंधन की आपूर्ति करने और इस्तेमाल की गई सामग्री वापस लेने के लिए तैयार है. जून में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने ईरान पर चौथी बार परमाणु मसले पर पाबंदियां लगाई और रूस ने उनका समर्थन किया था. पश्चिमी देशों को आशंका है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित करने की कोशिशों में जुटा है.

राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ने एक बैठक में घोषणा की है कि ईरान का लक्ष्य सैटेलाइट प्रक्षेपित करने का है. सैटेलाइट पहले 700 किलोमीटर की ऊंचाई तक छोड़ा जाएगा और फिर उसे 1000 किलोमीटर तक पहुंचाया जाएगा. ईरान की इस घोषणा से पश्चिमी जगत में उसकी मिसाइल क्षमता पर नए सवाल खड़े हो सकते हैं. लॉन्ग रेंज बैलेस्टिक तकनीक के जरिए सैटेलाइट को कक्षा में छोड़ा जाता है और इसी तकनीक के सहारे मिसाइलें भी छोड़ी जा सकती हैं.

ईरान पहले भी सैटेलाइट छोड़ चुका है लेकिन तब वह सिर्फ 250 किलोमीटर की ऊंचाई तक ही जा पाया था. अमेरिका ने उसे उकसावेपूर्ण कार्रवाई बताया था. इस्राएल ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर नजदीक से नजर रखता है क्योंकि वह इसे अपने अस्तित्व के लिए खतरा मानता है. इस्राएल ने बुशहर परमाणु संयंत्र और ईरान की आलोचना की है. ऐसी आशंकाएं जताई जाती रही हैं कि इस्राएल ईरान के परमाणु रिएक्टर पर हमला कर सकता है लेकिन अहमदीनेजाद का कहना है कि ऐसा कदम आत्मघाती साबित होगा.

रिपोर्ट: एजेंसियां/एस गौड़

संपादन: आभा एम

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