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दुनिया

ईरान पर कंप्यूटर वायरस का हमला

एक वायरस औद्योगिक संस्थानों के कंप्यूटरों पर हमला कर रहा है और इसका सबसे बड़ा निशाना ईरान बना है. एक अमेरिकी टेक्नॉलाजी कंपनी के विशेषज्ञ के मुताबिक इस वायरस की ताकत को देखकर लगता है कि इसे किसी बड़ी शक्ति ने बनाया है.

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बुशेर परमाणु संयंत्र

सिमेंटेक कंपनी में सुरक्षा मामलों के वरिष्ठ डायरेक्टर केविन होगन ने कहा कि स्टुक्सनेट नाम के इस वायरस ने दुनिया में जितने कंप्यूटरों पर हमला किया, उसके 60 फीसदी ईरान में हैं. इससे लगता है कि वहां के औद्योगिक संयंत्रों को निशाना बनाया गया है.

स्टुक्सनेट को लेकर इस तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं कि इसे बुशेर में हाल ही में शुरू हुए ईरान के पहले परमाणु संयंत्र को नुकसान पहुंचाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है. होगन ने कहा, "इस वायरस के व्यवहार से साफ जाहिर है कि निशाना ईरान है." यह वायरस दुनियाभर में इस्तेमाल होने वाले सीमेंस एजी के इंडस्ट्रियल सिस्टम को निशाना बना रहा है.

सुरक्षा और राजनयिक सूत्र कहते हैं कि पश्चिमी देश और इस्राएल ईरान के परमाणु कार्यक्रम की गति धीमी करने के लिए इस तरह के नुकसान को एक तरीका मानते हैं. पश्चिमी ताकतों का कहना है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम खतरनाक है क्योंकि वह परमाणु हथियार बनाना चाहता है. उधर ईरान का कहना है कि वह परमाणु ऊर्जा का इस्तेमाल शांतिपूर्ण कामों के लिए करना चाहता है.

होगन ने कहा कि किसी खास औद्योगिक क्षेत्र को कंप्यूटर वायरस के जरिए निशाना बनाना तो संभव नहीं है, इसका असर तो रिफाइनरी, फैक्ट्री, जल संशोधन संयंत्र या फिर तेल सेक्टर किसी पर भी हो सकता है. लेकिन एक बात को लेकर वह स्पष्ट हैं कि वायरस बड़े स्रोतों से बनाया गया है जो किसी एक आदमी के बस की बात नहीं. इसे बनाने वाले के पास असीम स्रोत होंगे.

होगन कहते हैं, "यह वायरस विशाल स्रोत, संगठन, कई क्षेत्रों की गहन जानकारी और खासतौर पर ईरान के बारे में सूचनाओं के आधार पर बना है. इसलिए इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि इसमें किसी बड़ी ताकत का हाथ हो सकता है."

रिपोर्टः एजेंसियां/वी कुमार

संपादनः महेश झा

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