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दुनिया

ईरान के साथ हो गई परमाणु सहमति

यूरोपीय संघ की विदेशनैतिक दूत फेडेरिका मोगेरिनी ने ईरान के साथ परमाणु समझौते की घोषणा की है. उन्होंने ट्वीट किया है, "सहमति हो गई है." सुरक्षा परिषद के वीटो सदस्यों के अलावा जर्मनी ईरान के साथ सालों से बातचीत कर रहा था.

समझौते पर वार्ता में देशों की अंतिम सहमति से पहले फेडेरिका मोगेरिनी ने ईरान के साथ हुई संधि को पूरी दुनिया के लिए उम्मीद की किरण बताया. उन्होंने कहा, "यह अंतरराष्ट्रीय संबंधों में नया अध्याय है." ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद जरीफ ने समझौते को ऐतिहासिक बताते हुए कहा, "हम उम्मीद का नया अध्याय शुरू कर रहे हैं." पश्चिमी देशों को उम्मीद है कि इस समझौते के साथ ईरान के लिए परमाणु बम का निर्माण मुश्किल हो जाएगा. ईरान को इसके साथ सालों से चल रहे आर्थिक प्रतिबंधों के खत्म होने की उम्मीद है. जर्मन विदेश मंत्रालय ने भी खबर ट्वीट की.

इस समझौते पर अमेरिकी कांग्रेस की सहमति भी जरूरी होगी जहां बहुत सारे सासंद ईरान के साथ किसी भी प्रकार के राजनीतिक सहयोग के खिलाफ हैं. इस्राएल के प्रधानमंत्री बेंयामिन नेतान्याहू ने भी ईरान के साथ परमाणु समझौते को ऐतिहासिक भूल कहा है.

दुनिया भर के कई विवादों की पृष्ठभूमि में ईरान के साथ समझौता कुछेक महत्वपूर्ण राजनयिक सफलताओं में शामिल है. यह इस्लामी क्रांति के बाद ईरान और अमेरिका के संबंधों में भी नई शुरुआत है. तेहरान के लिए यह समझौता विदेशनैतिक अलगाव से बाहर निकलने का संकेत है और इलाके की ताकत के रूप में उसकी हैसियत को मजबूत करेगा.

व्यापार की उम्मीद

ईरान के साथ परमाणु विवाद का हल होने के बाद कारोबारी उम्मीदें बढ़ गई हैं. इस समय चीन का दौरा कर रहे जर्मन वाणिज्य मंत्री जिगमार गाब्रिएल इसी रविवार को ईरान के दौरे पर जाने की सोच रहे हैं. अपनी तीन दिनों की यात्रा पर वे ईरानी नेतृत्व के साथ कारोबारी जगत के प्रतनिधियों से भी बातचीत करेंगे. उन्होंने जर्मन उद्योग जगत के कई सारे प्रतिनिधियों को अपने साथ तेहरान आने का न्यौता दिया है. उनमें जर्मन वाणिज्य संघ के प्रमुख एरिक श्वाइत्सर भी हैं. संघ ने इसकी पुष्टि की है.

जर्मन अर्थव्यवस्था को परमाणु विवाद में सहमति के बाद ईरान के साथ अरबों यूरो का कारोबार होने की उम्मीद है. तेहरान का दौरा कर रहे जर्मन कारोबारी संघ डीआईएचके के विदेश व्यापार प्रमुख फोल्कर ट्रायर ने कहा, "यदि सब कुछ ठीक ठाक रहा तो हम तीन-चार साल में 10 अरब की सीमा पार कर लेंगे." पिछले साल जर्मन कंपनियों ने ईरान को 2.4 अरब यूरो का माल बेचा था. बहुत सा सौदा पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण नहीं हो पाया. ट्रायर ने कहा, "ईरान को काफी बकाया पूरा करने की दरकार है. जर्मन उत्पादों की बड़ी मांग होने की संभावना है, मसलन खनिज तेल और गैस की निकासी के संयंत्रों, रसायन, उपभोक्ता माल, टेक्सटाइल और खाद्य पदार्थों के क्षेत्र में." जर्मन वाणिज्य संघ के अनुसार ईरान में करीब 80 जर्मन कंपनियों की शाखाएं हैं जबकि वहां करीब 1000 एजेंट और सर्विस प्रतिनिधि हैं.

इसके उलट जर्मनी के मैन्युफैक्चरिंग उद्योग ने संयमित प्रतिक्रिया दिखाई है. वीडीएमए के प्रमुख थीलो ब्रॉटमन ने कहा कि लंबे समय तक आयात से महरूम रहे देश में अभी बहुत से अनुत्तरित सवाल हैं. उन्होंने कहा कि सहमति को पहले कानूनी अमल में लाना होगा "और इसमें अभी समय लगेगा." विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले सालों में ईरान का मशीनरी आयात बढ़कर 8 अरब यूरो हो जाएगा. इसमें भागीदारी की जर्मन कंपनियों की भी उम्मीदें हैं. प्रतिबंधों के दौरान जर्मनी का हिस्सा 25 प्रतिशत से गिरकर 12 प्रतिशत रह गया जबकि चीन और दक्षिण कोरिया की कंपनियों को इसका फायदा हुआ.

एमजे/आईबी (डीपीए)

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