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दुनिया

ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत

लंबे इंतजार के बाद दुनिया भर की बड़ी शक्तियों ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर जेनेवा में चर्चा शुरू कर दी है. दो दिन की बातचीत में सहमति बननी तो मुश्किल है लेकिन बातचीत शुरू होना ही उपलब्धि माना जा रहा है.

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन के अलावा जर्मनी भी इस बातचीत में शामिल है. उन्हें उम्मीद है कि इस साल हसन रोहानी के राष्ट्रपति बनने के बाद बातचीत के सकारात्मक नतीजे निकल सकते हैं.

लगभग एक दशक पुराने ईरानी परमाणु कार्यक्रम को पश्चिमी दुनिया संदेह की नजर से देखती है और उसका कहना है कि ईरान इसकी आड़ में परमाणु बम बनाने की कोशिश कर रहा है. ईरान लगातार इस बात से इनकार करता आया है और दावा करता है कि उसका उद्देश्य शांतिपूर्वक बिजली बनाना है.

स्विट्जरलैंड के खूबसूरत शहर जेनेवा में छोटी मोटी सफलता भी आगे का रास्ता खोल सकती है. हालांकि ईरान के विदेश मंत्री मुहम्मद जावेद जारीफ का कहना है कि इसके लिए पश्चिमी देशों को बहुत मेहनत करनी पड़ेगी, "अगर हर अपनी तरफ से पूरी कोशिश करे, तो (समझौता) हो सकता है." उन्होंने गुरुवार को नाश्ते पर यूरोपीय संघ की विदेश मामलों की प्रभारी कैथरीन एश्टन से मुलाकात की.

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ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सवाल

नतीजे से दूर

जब उनसे पूछा गया कि दुनिया के छह बड़े देशों से बातचीत को वह कैसे देखते हैं, तो उन्होंने कहा, "हम गंभीर बातचीत की उम्मीद कर रहे हैं. यह संभव है." अमेरिका ने इस बात के संकेत दिए हैं कि ईरान पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों को ढीला किया जा सकता है. एक अमेरिकी अधिकारी ने बुधवार को कहा कि पाबंदियां "अस्थायी तौर पर, सीमित तरीके से" हटाई जा सकती हैं, लेकिन इसके लिए ईरान को सही कदम उठाने होंगे. ईरान पर कई दौर के आर्थिक प्रतिबंध लगाए गए हैं, ताकि वह अपने परमाणु कार्यक्रम को बंद करे. हालांकि अधिकारियों ने यह नहीं बताया है कि किस तरह की पाबंदियां हटाई जा सकती हैं लेकिन अमेरिका के एक अधिकारी का कहना है कि विदेशों में जाम की गई ईरानी संपत्ति पर से रोक हट सकती है.

जरीफ ने इस बीच फेसबुक पर लिखा है, "उद्घाटन समारोह के बाद मेरे सहयोगी और देशों के प्रतिनिधि ज्यादा व्यापक और बारीक बातचीत में उतरने वाले हैं, जो हमेशा से बहुत मुश्किल होती है." हालांकि दोनों पक्ष सकरात्मक बातचीत की बात कर रहे हैं लेकिन अमेरिका ने साफ कह दिया है कि सभी को स्वीकार होने लायक समझौता तैयार करने के लिए बहुत काम करना होगा.

पश्चिमी देशों के बार बार कहने के बाद भी जब ईरान ने यूरेनियम संवर्धन पर रोक नहीं लगाई, तो उस पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए गए, जिससे उसकी अर्थव्यवस्था पर खासा असर पड़ा है. उसकी मुद्रा बुरी तरह प्रभावित हुई है, जबकि देश में महंगाई भी बेतहाशा बढ़ी है.

एजेए/एनआर (रॉयटर्स, एएफपी)

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