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दुनिया

ईरान के खिलाफ एकजुट हुए 11 अरब देश

मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका के 11 देशों ने एकजुट होकर ईरान पर आतंकवाद को प्रायोजित करने और अरब देशों के मामले में दखंलदाजी का आरोप लगाया है.

इन देशों ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को लिखे पत्र में यह बात कही है. पत्र के मुताबिक ईरान पूरे क्षेत्र में तनाव भड़का रहा है. इन देशों का कहना है कि ईरान यमन में शिया हूथी बागियों का समर्थन कर रहा है जबकि लेबनान में शिया हिज्बुल्लाह गुट का साथ दे रहा है. हिज्बुल्लाह ने सीरिया में अपने सैनिक भेजे हैं जो राष्ट्रपति बशर अल असद की तरफ से लड़ रहे हैं.

पत्र में ईरान पर बहरीन, इराक, सऊदी अरब, कुवैत और अन्य देशों में आतंकवादी गुटों और ईकाइयों को समर्थन देने का आरोप भी लगाया गया है. इन 11 देशों ने सितंबर में बहरीन के विदेश मंत्रालय की तरफ से दिए गए बयान को भी दोहराया जिसके मुताबिक ईरान को अपनी विदेश नीतियों में बदलाव करना होगा और दुश्मनी खत्म करनी होगी.

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ईरान के मुद्दे पर इन देशों को संयुक्त अरब अमीरात ने एकजुट किया है और पत्र पर जिन देशों ने हस्ताक्षर किए हैं उनमें सऊदी अरब, मिस्र, सूडान, मोरक्को, बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, यमन और जॉर्डन के नाम शामिल हैं. शिया बहुल ईरान और ज्यादातर सुन्नी बहुल अरब देशों में अकसर तनाव रहता है. सीरिया से लेकर यमन तक विभिन्न मुद्दों पर उनकी सोच और हितों में टकराव होता आया है.

यमन में सितंबर 2014 से गृह युद्ध छिड़ा है जहां हूथी बागियों ने राजधानी सना पर कब्जा कर लिया जिसके बाद राष्ट्रपति अब्द रब्ब मंसूर हादी को सऊदी अरब जाना पड़ा. सऊदी नेतृत्व वाली खाड़ी देशों का गठबंधन हूथी बागियों के खिलाफ वहां हवाई हमले कर रहा है.

ईरान अपने ऊपर लगने वाले इन आरोपों को खारिज करता है कि वो हूथी पर बागियों का साथ दे रहा है. संयुक्त राष्ट्र महासभा में ईरानी राजनयिक अब्बास यजदानी उलटे यूएई और अन्य अरब देशों पर सीरिया, इराक और अन्य देशों में आतंकवादियों की मदद करने का आरोप लगाते हैं.

एके/ओएसजे (एपी)

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