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दुनिया

ईरान करवाएगा परमाणु संयत्रों की जांच

ईरान यूरेनियम के संवर्धन में कमी करने और 20 जनवरी से अपने परमाणु कार्यक्रमों की रोजाना जांच के लिए तैयार हो गया है. इसके बदले में उस पर लगी कई आर्थिक पाबंदियां कम होने जा रही हैं.

ईरान और विश्व की छह सबसे शक्तिशाली अर्थव्यवस्थाएं ईरान के विवादास्पद परमाणु कार्यक्रम पर हुए अंतरिम समझौते को 20 जनवरी से लागू करेंगी. कुछ अमेरिकी कानूनविदों ने इस समझौते को लेकर बहुत सी आशंकाएं जताई हैं और ईरान को ढील देने के बजाए उस पर और कड़ी पाबंदियां लगाने की मांग की है.

परमाणु हथियार मुक्ति की ओर

ईरान की आईआरएनए समाचार एजेंसी ने ईरान के उप विदेश मंत्री अब्बास अराघची के हवाले से खबर दी कि बीते नवंबर में परमाणु कार्यक्रम पर हुए समझौते को 20 जनवरी से लागू किया जाएगा. एजेंसी ने बताया कि ईरान संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) को अपने परमाणु संयंत्रों और सेंट्रिफ्यूज उत्पादन प्रणाली की जांच करने देगा. अंतरराष्ट्रीय निगरानी से इस बात की पुष्टि हो सकेगी कि ईरान समझौते के नियमों का पालन कर रहा है. अराघची ने बाद में सरकारी टेलीविजन चैनल पर बताया कि इस समझौते के अंतर्गत देश को तेल के लिए मिलने वाले 4.2 अरब डॉलर का रूका हुआ भुगतान मिल पाएगा.

वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा है कि ईरान को कुल 7 बिलियन डॉलर की राहत मिलेगी. ओबामा ने एक वक्तव्य जारी कर कहा कि ये समझौता "ईरान को परमाणु हथियार न हासिल करने देने के हमारे लक्ष्य की ओर आगे बढ़ाता है." ओबामा ने कहा, "मुझे पता है कि यह लक्ष्य कितना कठिन है लेकिन अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और पूरे विश्व की शांति और सुरक्षा के लिए देशों के बीच राजनीतिक संबंधों को सुधारने का यही सही मौका है."

जेनेवा समझौते की शर्तें

24 नवंबर 2013 को जेनेवा में हुए समझौते के तहत ईरान ने मान लिया कि वह अपने यूरेनियम को पांच फीसदी तक ही संवर्धित करेगा. पांच फीसदी संवर्धन से बिजली बनाने लायक परमाणु ईंधन मिलता है. यूरेनियम को इससे बहुत ज्यादा संवर्धित करने पर उससे परमाणु हथियार भी बनाए जा सकते हैं.

समझौते में इस बात पर भी सहमति बनी थी कि ईरान 20 फीसदी संवर्धित यूरेनियम का उत्पादन नहीं करेगा जिससे परमाणु हथियार बनाए जा सकते हैं. साथ ही भविष्य के लिए संचित अपने 20 प्रतिशत संवर्धित भंडार को भी छह महीने के भीतर नष्य कर देगा. इसके बदले में इन छह महीनों के लिए ब्रिटेन, चीन, फ्रांस, जर्मनी, रूस और अमेरिका ईरान पर लगाए गए कुछ आर्थिक प्रतिबंध ढीले करेंगे और एक स्थाई समझौते की ओर बढ़ने की कोशिश करेंगे.

आगे हैं और चुनौतियां

ईरान अब पेट्रोकेमिकल्स और सोने का निर्यात कर पाएगा जो कि प्रतिबंधों की वजह से रुका हुआ था. लेकिन अभी भी उसे अमेरिकी बैंकों से वित्तीय लेन देन की अनुमति नहीं मिली है. कई अमेरिकी कानूनविद् और कुछ डेमोक्रेट नेता ईरान पर और प्रतिबंध लगाए जाने की मांग कर रहे हैं. वे चाहते हैं कि ईरान के कई व्यावसायिक संस्थानों को ब्लैकलिस्ट किया जाए और ऐसे बैंकों और कंपनियों पर अमेरिका में रोक लगाई जाए जो ईरान को तेल निर्यात में किसी भी तरह से मदद पहुंचा रहे हैं.

उनकी मांग है कि अगर ईरान नवंबर में हुए समझौते के अनुसार आगे नहीं बढ़ता तो उस पर ये प्रतिबंध लगा देने चाहिए. इन नए प्रतिबंधों की मांग को देखते हुए ईरान के कट्टरपंथी वहां की सरकार पर दबाव डाल रहे हैं कि वह यूरेनियम संवर्धन को न रोके. अराघची ने भी कहा है कि किसी भी नए प्रतिबंध को स्वीकार नहीं किया जाएगा. "अब और प्रतिबंध लगाने से हमारी इस मामले को शांतिपूर्वक सुलझाने की कोशिशें बर्बाद हो जाएंगी और मैं समझौते के दौरान ऐसा कोई भी नया प्रतिबंध लाने के कानून के मसौदे को अस्वीकार करूंगा."

आरआर/एमजे(एपी)

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