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दुनिया

ईरानी तेल से दौड़ेगा भारत

प्रतिबंध ढीले होने के साथ ही भारत तेहरान से तेल आयात बढ़ाने जा रहा है. आने वाले दिनों में भारत अपने पड़ोसी से इतना तेल खरीदेगा कि दोनों देशों के घाटे की भरपाई हो जाए. भारतीय कंपनियां भी बीमा संकट से बाहर आईं.

ईरान से सबसे ज्यादा कच्चा तेल खरीदने वाले चार देशों में भारत भी है. 24 नवंबर को जिनेवा में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर हुए समझौते के बाद अब तेहरान से आर्थिक प्रतिबंध हटाए जा रहे हैं. हालांकि समझौते के तहत ईरान पहले छह महीनों में अपना तेल निर्यात नहीं बढ़ा सकेगा. लेकिन इसके बावजूद समझौते की कुछ शर्तें भारत को अपने तेल आयात में आई 40 फीसदी कमी की भरपाई का मौका दे रही हैं.

कुछ ज्यादा ही कमी

बुधवार को भारत के पेट्रोलियम मंत्रालय के सचिव विवेक राय ने कहा कि भारत 31 मार्च को खत्म होने वाले मौजूदा वित्तीय वर्ष में ईरान से और तेल खरीदेगा. राय के मुताबिक भारत औसतन ईरान से प्रति दिन करीब सवा दो लाख बैरल तेल खरीदेगा. तेहरान पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते भारत को इस साल ईरान से 15 फीसदी कम तेल खरीदना था. लेकिन अप्रैल से अक्टूबर के बीच भारत और ईरान के तेल काराबोर में इससे भी ज्यादा गिरावट आई.

इस वित्तीय वर्ष में अब तक भारत ने ईरान से औसतन प्रति दिन पौने दो लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा. ऐसे में भारत के पास मौका है कि वो दिसंबर से मार्च के बीच ईरान के खूब तेल खरीदे और व्यापार घाटे की भरपाई कर दे.

अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते भारतीय रिजर्व बैंक ईरान को तेल का भुगतान भी नहीं कर पा रहा था. भारतीय अधिकारियों के मुताबिक भुगतान समस्या के चलते भारत पर ईरान का 5.3 अरब डॉलर का कर्ज बकाया है.

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जिनेवा में समझौता

बीमा संकट भी टला

भारत की प्रमुख सरकारी तेल रिफाइनरी हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने तो कह दिया है कि वो ईरान से ज्यादा तेल खरीदने के लिए तैयार है. जिनेवा समझौते के साथ ही हिंदुस्तान पेट्रोलियम के बीमे पर लगी कुछ पाबंदियां हट गई हैं. उम्मीद है कि अमेरिका जल्द ही भारत, चीन, दक्षिण कोरिया और जापान की कई कंपनियों को इस तरह की पाबंदियों से बाहर कर देगा. ये चारों देश ईरानी तेल के सबसे बड़े ग्राहक हैं.

भारत 2014-15 में ईरान से ज्यादा तेल खरीदेगा. तेल सचिव राय कहते हैं, "ईरान तेल का अच्छा स्रोत है, एक बार ईरान समस्याओं से बाहर आ जाए तो हमारे सामने बाजार में और ज्यादा तेल उपलब्ध होगा."

जिनेवा समझौते के तहत ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम की अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों से निगरानी करानी होगी. साथ ही ईरान को किसी भी तरह यूरेनियम का उच्च संवर्धन नहीं करना होगा. संवर्धन की सीमा सिर्फ पांच फीसदी रखी गई है. परमाणु ऊर्जा हासिल करने के लिए ये काफी है. इसके बदले पश्चिमी देशों ने ईरान पर लगाए गए कुछ आर्थिक प्रतिबंध ढीले किए हैं. ढील से ईरान की अर्थव्यवस्था में आठ अरब डॉलर आएंगे. छह महीने के भीतर परमाणु कार्यक्रम की एक बार फिर समीक्षा होगी. सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्य और जर्मनी अगर संतुष्ट हुए तो ईरान से प्रतिबंध मुक्त किया जाएगा.

ओएसजे/एजेए (रॉयटर्स)

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