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दुनिया

ईयू में बढ़ रहे यूरोप विरोधी धड़े

ब्रिटेन में यूकेआईपी का मजबूत होते जाना उस लहर का संकेत है जो यूरोप में धीरे धीरे जोर पकड़ रही है. यह लहर है यूरोपीय संघ के विरोध की.

ब्रिटेन में छह महीने में राष्ट्रीय चुनाव होने वाले हैं. इससे पहले हुए स्थानीय चुनावों में दक्षिणपंथी पार्टी यूकेआईपी ने अपने पैर मजबूत करने शुरू कर दिए हैं. ताजा उप चुनावों में फिर सत्ताधारी रुढ़िवादी टोरी पार्टी को हार मिली और "एक यूरोप" का विरोध करने वाली दक्षिणपंथी पार्टी यूकेआईपी के मार्क रेकलेस जीत गये. यह एक ऐसी लहर है जो पूरे यूरोपीय संघ में जोर पकड़ रही है.

जर्मनी की एएफडी पार्टी

जर्मनी में सत्ता में आने वाली 'ऑल्टरनेटिव फॉर जर्मनी' एएफडी पार्टी भले ही पिछले राष्ट्रीय चुनावों में पांच फीसदी से ज्यादा वोट पाने से रह गई हो लेकिन जर्मनी के दो राज्यों में वह तेजी से ऊपर उठी है और राष्ट्रीय स्तर पर वह फिलहाल सात फीसदी ले चुकी है. देश के 16 में तीन विधानसभाओं में उसकी सीटें हैं. थ्यूरिंजिया चुनावों में उसे 10.2 और ब्रांडेनबुर्ग में उसे 11.9 फीसदी मत मिले. इतना ही नहीं सेक्सनी में भी उसने 9.7 प्रतिशत मत पाए. जर्मनी के अर्थव्यवस्था और ऊर्जा मंत्री जीगमार गाब्रिएल कहते हैं, "एएफडी की नीतियां चौंकाने की हद तक यूरोप विरोधी हैं. अच्छा कमाने वाले प्रोफेसर, बिजनेस लॉबिस्ट ऐसा कर सकते हैं क्योंकि उनकी नौकरियां और आय सुरक्षित है. लेकिन कुशल कामगार और मजदूर एक निर्यातक देश होने के कारण हम पर निर्भर हैं, हमें यूरोप की जरूरत है."

फ्रांस में अति दक्षिणपंथ

फ्रांस में अति दक्षिणपंथी नेता मारीन ले पेन ने तहलका मचा रखा है. हो सकता है कि 2017 के राष्ट्रपति चुनावों में वह सोशलिस्ट पार्टी की बखिया उधेड़ दें. ताजा सर्वे के मुताबिक अगर फ्रांस आज राष्ट्रपति को चुनता तो ले पेन निश्चित जीत जातीं. ले पेन की यूरोप और प्रवासन विरोधी पार्टी मई में हुए यूरोपीय संघ के चुनावों में वैसे भी झंडा गाड़ चुकी है.

यूरोपीय चुनावों में ग्रीस में बचत का विरोध करने वाली वामपंथी सिरिसा पार्टी को 27 फीसदी मत तो मिले लेकिन मध्य दक्षिणपंथी पार्टी भी पीछे नहीं थी और अति दक्षिणपंथी पार्टी को भी नौ फीसदी मत मिले.

डेनमार्क, हंगरी और नीदरलैंड्स में भी

डेनमार्क, हंगरी सहित कई देशों में यूरोप विरोधी दक्षिणपंथी पार्टियों का बोलबाला रहा, यूरोपीय संघ के चुनावों में भी और साथ ही देशों में भी ये भावना धीरे धीरे जोर पकड़ रही है.

यूरोपीय संघ में हालांकि फ्रांस की ले पेन और नीदरलैंड्स के गैर्ट विल्डर्स भले ही अभी साझा दक्षिणपंथी धड़ा बना पाने में विफल रहे हों लेकिन जिस तरह की लहर अभी यूरोप में चल रही है उसे देखते हुए हैरानी नहीं होगी कि आने वाले दिनों में यह धड़ा ईयू में मजबूत हो जाए और यूरोप को आगे बढ़ाने वाली नीतियों का विरोध करने लगे.

जर्मनी के पूर्व विदेश मंत्री योश्का फिशर ने अपनी नई किताब 'यूरोप इज फॉलिंग' में लिखा है, "बड़ा सवाल यह है कि क्या हम जर्मन यूरोप की ओर बढ़ रहे हैं या फिर युद्ध के बाद वाले यूरोपीय जर्मनी की ओर. हम आज भी नहीं जानते कि मैर्केल का लक्ष्य कौनसा यूरोप है." फिशर कहते हैं कि आर्थिक मुद्दों पर यूरोप का एक ब्लॉक के तौर पर फैसला लेना जरूरी है. ऐसा नहीं होने पर एंटी यूरोपीय विचारधारा की पार्टियां मजबूत होंगी. वह कहते हैं, "यूरोप हमारा सबसे अच्छा निवेश है और इस प्रोजेक्ट के विफल होने पर सबसे बड़ा नुकसान हमें ही होगा."

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