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दुनिया

ईयू ने बताया एर्दोआन के आरोपों को बेबुनियाद

तुर्की के राष्ट्रपति रेचप तैय्यप एर्दोआन ने यूरोपीय संघ पर आरोप लगाया है कि वह वापस भेजने वाले सीरियाई शरणार्थियों के बदले मदद देने के वादे को पूरा नहीं कर रहा है. ब्रसेल्स ने इन आरोपों को खारिज किया.

मार्च में तुर्की और यूरोपीय संघ के बीच समझौते पर हस्ताक्षर होने के समय से ही इस पर विवादों का साया रहा है. दोनों पक्षों के बीच तय हुआ था कि एजियान सी के रास्ते ग्रीस के तटों पर पहुंचे सीरियाई शरणार्थियों को वापस तुर्की भेजा जाएगा और इन्हें स्वीकार करने के बदले उन्हें राजनैतिक और आर्थिक प्रोत्साहन दिया जाएगा.

इस प्रोत्साहन में अरबों यूरो की सहायता राशि, तुर्क लोगों की यूरोप में वीजा-मुक्त यात्रा और ईयू में सदस्यता के लिए तुर्की को दावेदारी पर त्वरित कार्रवाई शामिल थी. लेकिन इसी महीने तुर्की में एर्दोआन सरकार के तख्तापलट की असफल कोशिश के बाद की गतिविधियों से दोनों पश्क्षों के बीच रिश्तों में तनाव बढ़ गया है.

ईयू ने 3 अरब यूरो देने का वादा किया था, लेकिन एर्दोआन का आरोप है कि अब तक उन्हें बहुत मामूली सी राशि ही मिली है. जर्मनी की सार्वजनिक प्रसारण सेवा के एआरडी टीवी को दिए इंटरव्यू में एर्दोआन ने कहा, "ये (यूरोपीय) सरकारें ईमानदार नहीं हैं." तुर्की में शरणार्थियों के बोझ के बारे में उन्होंने कहा, "तीस लाख सीरियाई या इराकी लोग अब तुर्की में हैं... ईयू के इस पर अपना वादा पूरा नहीं किया है."

ब्रसेल्स की यूरोपीय परिषद की ओर से इन आरोपों को गलत बताया गया है. इसे खारिज करते हुए परिषद के प्रवक्ता मार्गरिटिस शिनास ने बताया, "यूरोपीय संघ अपनी प्रतिबद्धताओं का सम्मान कर रहा है और इसके उलट जाने की बात बिल्कुल सही नहीं है." उन्होंने बताया कि अब तक ईयू 74 करो़ड़ यूरो की राशि आवंटित कर चुका है और इस महीने के अंत तक करीब 1.4 अरब यूरो और अलग कर देगा. यानि कुल मिलाकर अब तक करीब 2.1 अरब यूरो का इंतजाम किया जा चुका है. इनमें से 10.5 करोड़ यूरो का भुगतान भी हो चुका है. हालांकि शिनास ने जोर देकर कहा कि यह फंड "तुर्की के लिए नहीं बल्कि शरणार्थियों के लिए" हैं.

एर्दोआन का अनुमान है कि शरणार्थियों पर अब तक तुर्की का करीब 12 अरब डॉलर यानि लगभग 10.9 अरब यूरो का खर्च आ चुका है. पिछले ही महीने ब्रसेल्स ने बताया था कि तुर्की को ईयू सदस्यता देने के मु्द्दे पर नए चरण के प्रयास शुरू हो गए हैं. लेकिन इन प्रयासों को तुर्की में तख्यापलट की कोशिश से नुकसान पहुंचा. 15 जुलाई को सेना ने तुर्की सरकार के खिलाफ कू किया था, जिसके फेल होने के बाद से वहां हजारों लोगों को हिरासत में लिया गया है और गंभीर मानवाधिकार संकट की स्थिति बनी हुई है. खासतौर पर विद्रोहियों को मृत्युदंड की सजा दिए जाने के एर्दोआन की मंशा से यूरोप नाराज है. 2004 में तुर्की में मृत्युदंड खत्म कर दिया गया था.

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