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मनोरंजन

ईट, प्रे, लवः जिंदगी के तीन खूबसूरत पड़ाव

अमेरिकी लेखिका एलिजाबेथ गिलबर्ट की किताब ईट प्रे लव दुनिया भर में हाथों हाथ ली गई. उनकी खुद की जिंदगी को बयान करने वाली यह कहानी सिनेमा के पर्दे पर कामयाब रही. तो झांकते हैं एलिजाबेथ की जिंदगी में.

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जब 32 साल की एलिजाबेथ गिलबर्ट की शादी टूटी तो उन्हें लगा कि जिंदगी खत्म हो गई है. वह बाथरूम में खुद को बंद करके रोया करतीं. दरअसल गिलबर्ट अपनी शादी से खुश नहीं थी, इसीलिए उन्होंने एक दूसरे व्यक्ति से नाता जोड़ा. लेकिन वह अकेलेपन का दर्द उठाने को तैयार नहीं थीं. अपने पति को दुख देने के लिए भी वह खुद को गुनहगार भी समझती थीं. लेकिन आखिरकार तलाक हुआ. फिर नई शुरुआत भी हुई.

Autroin Elizabeth Gilbert

एलिजाबेथ गिलबर्ट ने जिंदगी को किताब में उतारा

मैं कौन हूं

परियों जैसे लगने वाली अपनी इस कहानी को अमेरिकी लेखिका एलिजाबेथ गिलबर्ट ने ईट, प्रे, लव किताब में उतारा. 2006 में प्रकाशित उनकी इस किताब पर एक फिल्म भी बनी है. शायद हर महिला की जिंदगी में एक ऐसा मोड़ आता है जब उसे खुद पर शक होने लगता है. क्या मैंने जिंदगी में ठीक फैसले लिए हैं, क्या मुझे मेरी जिंदगी को लेकर कुछ अलग नहीं करना चाहिए था. ऐसे ख्यालों की वजह कोई हादसा भी हो सकता है. मसलन किसी करीबी का बीमारा होना या फिर दुनिया ही छोड़ जाना. जिंदगी में छोटे मोटे दर्द भी ऐसे सवालों को हमारे सामने ला कर खड़ा कर देते हैं. ऐसे पल हर किसी की जिंदगी में आते हैं. और यही है ईट प्रे लव किताब और उस पर बनी फिल्म की कामयाबी की वजह.

अमेरिकी अभिनेत्री और प्रीटी वुमन जूलिया रॉबर्ट्स ईट, प्रे, लव में एलिजाबेथ गिलबर्ट का किरदार निभा रहीं हैं. वह कहती हैं, "मेरा मानना है कि हर किसी के जीवन में ऐसा पल आता है जब आप यह सोचने पर मजबूर हो जाते हैं कि आप कौन हैं, आपकी पहचान क्या है और आप जीवन से क्या चाहते हैं. इसीलिए हर कोई इस आईने में अपनी छवि देख सकता है."

जिंदगी एक सफर

इट, प्रे, लव एलिजाबेथ गिलबर्ट की अपनी जिंदगी की कहानी है. वह सिर्फ लेखिका ही नहीं, पत्रकार भी हैं. लेकिन 2001 में शादी टूटने

Julia Roberts und Javier Bardem in einer Szene vom Film Eat, Pray, Love

ईट, प्रे, लव का एक सीन

के बाद जब वह एक अजीब सी कैफियत से घिरी थीं, तभी योग पर एक लेख के सिलसिले में उन्हें इंडोनेशिया जाना पड़ा. वहां एक साधू ने भविष्यवाणी कर डाली कि एलिजाबेथ गिलबर्ट फिर इंडोनेशिया आएंगी और सदियों पुराने इलाज के तौर तरीके सीखेंगी. वैसे एलिजाबेथ को इन सब बातों पर कोई विश्वास नहीं था. लेकिन अचानक वह एक फैसला करती हैं. खुद को तलाशने के लिए और अपनी असल पहचान को समझने के लिए. वह एक साल दुनिया घूमेंगी. चार महीने इटली में रहेंगी. इतालवी भाषा सीखेंगी और वहां का खाना खाएंगी. प्रार्थना, श्रद्धा और मन की शांति के लिए भारत जाएंगी. और साल के आखिरी चार महीने इंडोनेशिया में बिताएंगी जैसा कि भविष्यवाणी भी हुई. लेकिन इंडोनेशिया में ऐसा कुछ हो जाता है जिसके बारे में एलिजाबेथ ने सोचा भी नहीं था. उन्हें प्यार हो जाता है. यानी ईट, प्रे, लव.

एलिजाबेथ गिलबर्ट का किरदार निभाना निभाना कैसा रहा, जूलिया रॉबर्टस बताती हैं, "शुरुआत में वह एक उधेड़बुन में जीती है. इस किरदार को निभाना मुश्किल था लेकिन मजेदार भी. उसके जीवन में और खास तौर से उसके शादीशुदा जीवन में एक ऐसा समय आता है जब उस पर किसी बात का असर नहीं होता. इसलिए जिंदगी को नए सिरे से जीने की चाह में वह एक साल के लिए सबसे दूर जाने का फैसला करती है. वह एक साल के लिए इन खास जगहों पर एक खास मकसद के साथ जाती है. इस किरदार ने मुझे अपना हुनर दिखाने का एक बहुत बड़ा मौका दिया है."

सफर के तीन पड़ाव

रोम, वेनिस या फिर मिलान जैसे खूबसूरत शहरों के लिए मशहूर इटली में एलिजाबेथ इटैलियन तो सीखती हैं ही, लेकिन जी भर कर पास्ता, पिज्जा या टिरामिसू खाने से उनका वजन भी कई किलो बढ़ जाता है. पर उन्हें जिंदगी की खूबसूरती का अहसास भी होता है. खिले हुए फूलों और बच्चों को

Indien Julia Roberts Eat Pray Love

हाल ही में हिंदू बनीं जूलिया रॉबर्स

खेलते देख एलिजाबेथ के लबों पर हंसी वापस आने लगती है. शायद इसीलिए इटली में जिंदगी को ला टोलचे वीटा, स्वीट लाइफ भी कहते हैं.

भारत में एलिजाबेथ एक आश्रम में रहती हैं. प्रार्थना के साथ वह आश्रम का अनुशासन भी सीखती हैं. सुबह चार बजह उठकर पोछा लगाती हैं और समझती हैं कि जिंदगी में कुछ भी पाने के लिए काम कितना जरूरी है. हिंदू धर्म को करीब से जानती हैं और समझती हैं कि उन्हें जिंदगी में जो कुछ मिला है, उसके लिए शुक्रिया अदा करना जरूरी है.

एलिजाबेथ के इस सफर का आखिरी पड़ाव है इंडोनिशिया जहां उनकी मुलाकात ब्राजील के एक उद्योगपति से होती है, प्यार हो जाता है और फिर शादी भी. फिलहाल एलिजाबेथ 40 साल की हैं और इसी ब्राजीली कारोबारी फेलिपे के साथ शादीशुदा जिंदगी गुजार रही हैं.

दुनियाभर में एलिजाबेथ गिलबर्ट की किताब की एक करोड़ से भी ज्यादा कॉपी बिक चुकी हैं. वह कहती हैं कि हर महिला के पास इतना पैसा नहीं है कि वह एक साल दुनिया घूमे. लेकिन एलिजाबेथ यह कर पाईं और इसे दुनिया के साथ बांटनी चाहती थीं. वह यह दिखाना चाहती थीं कि तरीका जो भी हो, हर एक महिला को विश्वास होना चाहिए कि उसमें मुश्किलों से पार पाने की ताकत है.

रिपोर्टः प्रिया एसेलबोर्न

संपादनः ए कुमार

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