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ब्लॉग

इस हिंसा के जिम्मेदार मनोहर लाल खट्टर हैं

मुश्किल हालात में ही नेतृत्व की असली परीक्षा होती है. राम रहीम का मामला भी ऐसा ही था. और जिस तरह की हिंसा हुई, उससे साफ पता चलता है कि हरियाणा के मुख्यमंत्री एक नाकाम प्रशासक हैं.

सैकड़ों गाड़ियों के काफिले के साथ बलात्कार का एक आरोपी अदालत में पेश होने के लिए निकला. वो भी ऐसे, जैसे कोई गर्व से भरी शोभा यात्रा निकल रही हो. राज्य सरकार के अंतर्गत आने वाली पुलिस ने सैकड़ों गाड़ियों को सिरसा से पंचकुला तक जाने दिया. लाखों की तादाद में समर्थकों को जमा होने दिया.

यानि बारूद जमा हो चुका था. अब बस चिंगारी की देर थी. सीबीआई कोर्ट के फैसले के बाद चिंगारी भी मिल गई. फिर जो हुआ वह सबके सामने है. थाने, सरकारी दफ्तर और गाड़ियां फूंक दी गई. पंचकुला में भीड़ को रास्ता देते हुए पुलिस पीछे हटने लगी. इसके बाद तो जैसे जंगलराज सा पसर गया. जिस व्यक्ति के ऊपर हालात काबू में करने की जिम्मेदारी थी वो शांति बनाये रखने के लिए गिड़गिड़ाता दिखाई दिया.

इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर में नेतृत्व की कितनी क्षमता है. न तो वह हालात को भांप सके और न ही हिंसा को रोक सके. शाम को राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के ट्वीट के बाद खट्टर हरकत में आए. ऐसा लगा जैसे किसी लताड़ से उन्हें मामले की गंभीरता समझ में आई हो. फिर उन्होंने माना कि प्रशासन से चूक हुई है. लेकिन वह भूल गए कि प्रशासन के मुखिया वह खुद हैं.

बलात्कार का एक आरोपी अगर 200 से ज्यादा ट्रेनें रद्द करवा दे, कई जिलों में कर्फ्यू लगवा दे, तो राज्य को समझना चाहिए कि वह कितना पंगु हो चुका है. और फिलहाल इस पंगुता का सबसे बड़ा चेहरा मनोहर लाल खट्टर हैं.

 

 

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