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दुनिया

इस साल शुरू हो सकती है यूएन के सुधार की बात

संयुक्त राष्ट्र में सुधार के लिए बातचीत इस साल शुरू हो सकती है. भारत, जापान, जर्मनी और ब्राजील इन सुधारों के लिए काफी समय से जोर लगा रहे हैं. ये सुधार इन देशों को सुरक्षा परिषद की स्थायी सीट दिला सकते हैं.

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संयुक्त राष्ट्र आम सभा के अध्यक्ष जोसेफ डीस ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र में सुधारों की बात पिछले करीब दो दशक से चल रही है लेकिन इस साल इस बारे में बातचीत असल में शुरू हो सकती है. उन्होंने कहा, "इस वक्त स्थिति काफी जटिल है और मैं उम्मीद करता हूं कि इस साल किसी वक्त हम कम से कम बातचीत शुरू करने की हालत में पहुंच जाएंगे."

Runder Tisch UN Sicherheitsrat

जी-4 के नाम से जाने जाने वाले भारत, जापान, जर्मनी और ब्राजील सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट चाहते हैं. दक्षिण अफ्रीका भी इस दौड़ में शामिल है. यह तभी संभव है जब संयुक्त राष्ट्र के ढांचे में बड़े बदलाव किए जाएं. इसके लिए कुछ मुश्किल सवालों के जवाब तलाशने होंगे. मसलन कितनी नई सीटें बनाई जाएं. और यह भी कि नए स्थायी सदस्यों को वीटो शक्ति दी जाए या नहीं.

इस वक्त सुरक्षा परिषद में पांच स्थायी सदस्य हैं. इन पांचों देशों ब्रिटेन, चीन, फ्रांस, रूस और अमेरिका को वीटो शक्ति हासिल है. इसके अलावा 10 अस्थायी सदस्य हैं जिन्हें दो साल के लिए चुना जाता है. पिछली बार सुरक्षा परिषद का विस्तार 1965 में किया गया जब इसकी सदस्य संख्या 11 से बढ़ाकर 15 कर दी गई. लेकिन तब संयुक्त राष्ट्र में 118 सदस्य थे जो अब बढ़कर 192 हो चुके हैं. और दूसरे विश्व युद्ध के वक्त बना संयुक्त राष्ट्र का ढांचा भी बदले हालात में अपने मायने खो चुका है. अब भारत और जर्मनी जैसे नए ताकतवर देश दुनिया के बीच अपनी अहम जगह चाहते हैं.

सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट की भारत की इच्छा को पिछले साल नवंबर में बड़ा बल मिला जब अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने पहली बार भारत का समर्थन किया. लेकिन भारत का उत्साह ज्यादा दिन तक नहीं टिका क्योंकि अमेरिकी अधिकारियों ने कुछ ही दिन बाद कह दिया बहुत जल्दी कुछ होने वाला नहीं है. हालांकि भारतीय राजनयिकों का कहना है कि भारत अगले दो साल में सुरक्षा परिषद की स्थायी सीट हासिल कर सकता है.

इसके लिए भारत बाकी इच्छुक देशों मसलन जर्मनी, दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील के साथ मिलकर जोर लगा रहा है. इसी साल भारत और जर्मनी सुरक्षा परिषद के अस्थायी सदस्य बने हैं. दक्षिण अफ्रीका भी इस वक्त सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य है और सभी देश मिलकर इस स्थिति का फायदा उठाना चाहते हैं.

रिपोर्टः एजेंसियां/वी कुमार

संपादनः एस गौड़

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