1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

दुनिया

इस बार बंदूकें नहीं, खाना और दवाएं आई

बाहर बंदूकें तैनात थीं और भीतर धीरे धीरे भूख जिंदगी को निवाला बना रही थी. चार साल तक भूख से लड़ने के बाद मदद आखिरकार दराया के लोगों तक पहुंच ही गई.

2012 से भूख से लड़ रहे दराया के लोगों ने जब खाने से लदे ट्रक आते देखे तो कइयों के आंसू छलक पड़े. बहुतों को पहली नजर में यकीन ही नहीं हुआ. निराश होकर मौत का इंतजार करने वाले भी दौड़े दौड़े ट्रकों के पास पहुंच गए. लोगों की गुजारिश देखकर राहत सामग्री बांटने वाले तक पिघल गए. सीरिया की राजधानी दमिश्क के पास बसे दराया शहर की सुबह कुछ ऐसी थी.

सीरियन अरब रेड क्रिसेंट के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र के साथ मिलकर उसने मेडिकल सप्लाई और खाना दराया तक पहुंचाया है. राहत सामग्री से भरे ट्रक गुरुवार आधी रात दराया पहुंचे. काफिले में कुल नौ ट्रक हैं.

संयुक्त राष्ट्र में सीरिया के दूत स्टाफान डे मिस्तुरा के मुताबिक सीरिया सरकार ने राहत सामग्री को अंदर भेजने की इजाजत दी, जिसके बाद ही यह संभव हो सका. 4,000 से 8,000 की आबादी वाले दराया को 2012 में सीज किया गया. असल में 2011 के अरब वसंत का असर सीरिया पर भी पड़ा. वहां भी राष्ट्रपति बशर अल असद के खिलाफ प्रदर्शन शुरू हुए. इसी दौरान दराया के लोगों ने सेना को खदेड़ दिया.

बस, तब से ही दराया को सीज किया गया था. संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक सीरिया के 19 इलाके अब भी सीज हैं. इनमें करीब 4 लाख 92 हजार 000 लोग रहते हैं. 16 इलाकों को विद्रोहियों या आतंकवादियों ने सीज किया है, वहीं तीन इलाकों को सरकार ने सीज किया है. दोनों पक्ष सीज किये गए इलाकों के लोगों को भूख से मारने की रणनीति अपना रहे हैं.

इस बीच सीरिया में सशस्त्र संघर्ष जारी है. पहले जिन्हें विद्रोही माना जा रहा था, बाद में पता चला कि उनमें से कई इस्लामिक स्टेट या दूसरे आतंकी संगठनों के लड़ाके हैं. अब कुर्द उग्रवादी और सीरियाई सेना मिलकर आतंकवादियों का सामना कर रहे हैं. अमेरिका और रूस की मदद से ये लोग इस्लामिक स्टेट के नियंत्रण में आए इलाकों को फिर से हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं.

DW.COM

संबंधित सामग्री