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दुनिया

इस्लाम का डर फैला कर जिंदा है अल कायदा

हाल में अमेरिका में जहां न्यूयॉर्क में मस्जिद बनाने का विरोध हो रहा है, वहीं कुरान को अपमानित करने की खबरें भी आईं. जानकार मानते हैं कि यह सब अल कायदा का खेल है जिसका मकसद दुनिया भर में इस्लाम का डर फैलाना है.

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लंदन के स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स एंड पॉलिटिकल साइंस में मध्यपूर्व और अंतरराष्ट्रीय मामलों के प्रोफेसर फवाज गेरगेस कहते हैं, "दुनिया भर में फैलते इस्लाम के डर के कारण की अल कायदा जिंदा है. अमेरिका में जो कुछ हो रहा है, वह भी ओसामा बिन लादेन के इशारे पर हो रहा है. आतंक के खिलाफ युद्ध की वजह से ही अल कायदा को विचारधारा मिलती है. इसी की बुनियाद वह लोगों से कहता है कि देखो इस्लाम खतरे में है और पश्चिमी देश मुसलमानों के खिलाफ युद्ध छेड़ रहे हैं."

गेरगेस मानते हैं कि पश्चिमी देश भी अपनी इच्छा के विरुद्ध ऐसे टकराव से जूझ रहे हैं जो है ही नहीं. वह इसे एक दुष्चक्र बताते हैं. हाल ही में जब अमेरिका के एक पादरी ने कुरान को जलाने की घोषणा की तो दुनिया भर में विवाद खड़ा हो गया. खास कर अफगानिस्तान और इंडोनेशिया में लोग हिंसा पर उतारू हो गए. गेरगेस कहते हैं कि इससे पता चलता है कि लोग कितनी जल्दी भड़क जाते हैं. हालांकि बाद में टैरी जोन्स नाम के इस पादरी ने अपनी योजना को यह कहते हुए टाल दिया कि उसे इस बात का भरोसा मिला है कि न्यूयॉर्क में ग्राउंड जीरो पर इस्लामिक सेंटर नहीं बनाया जाएगा. यह वही जगह है जहां 2001 में आंतकवादी हमला हुआ था.

गेरगेस और फ्रांस के प्रतिष्ठित ईएचईएसएस स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज के दोमेनिक थॉमस इस बात पर एकमत है कि यह समझना बहुत जरूरी है कि अल कायदा इस्लाम की अपनी कट्टरपंथी व्याख्या के जरिए अपने एजेंडे को आगे बढ़ाता है और राजनीतिक लक्ष्यों को हासिल करना चाहता है. गेरगेसे के मुताबिक, "इंतजार करो और देखोः कुछ ही दिनों में अल कायदा के नंबर दो नेता अयमान अल जवाहिरी का कोई ऑडियो टेप सामने आएगा जिसमें कुरान से संबंधित हालिया घटनाक्रम का ही जिक्र होगा. अभी इसे सुरक्षा कारणों से जारी नहीं किया जा रहा होगा."

वहीं थॉमस कहते हैं, "वे कहते हैं कि पश्चिमी देशों ने हमारी जमीन पर कब्जा कर रखा है. वे हमारी दौलत हड़प रहे हैं. हम पर हमला कर रहे हैं. हमारे लोगों को मार रहे हैं. औरत और बच्चों को मार रहे हैं. यह सब राजनीतिक ही है. इसका इस्लाम से कोई लेना देना नहीं है." गेरगेस और थॉमस कहते हैं कि 11 सितंबर के आत्मघाती हमलावरों का मकसद जाने बिना सिर्फ उन्हें मुसलमान के तौर पर देखने से हमले की वजह समझ नहीं आएगी.

ब्रिटेन में स्वघोषित मुस्लिम संसद के नेता ग्यासुद्दीन सिद्दीकी भी मानते हैं कि जिहादी भी राजनीतिक हैं. वह कहते हैं, "ये जिहादी अपने राजनीतिक एजेंडे के लिए इस्लामी भाषा का इस्तेमाल करते हैं. इस वह नए लोगों की भर्ती भी करते हैं. यह बहुत अफसोस की बात है. इस्लाम का उनके एजेंडे से कोई लेना देना नहीं है. इस्लाम तो एक सादा सा धर्म है. यह एकता, दया, वचनबद्धता, सब लोगों के लिए सम्मान और कानून के राज की बात करता है."

रिपोर्टः एएफपी/ए कुमार

संपादनः ओ सिंह

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