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दुनिया

"इस्लामिक स्टेट को तबाह कर देगा अमेरिका"

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने देश के नाम संदेश में कहा है कि कैलिफोर्निया में हुआ हमला "एक आतंवादी हमला था जिसका मकसद बेगुनाह लोगों की जान लेना था" और इसके जवाब में अमेरिका "इस्लामिक स्टेट को तबाह" करने को तैयार है.

कैलिफोर्निया के सैन बेरनार्डीनो में पिछले हफ्ते हुए हमले में 14 लोगों की जान गयी. हमलावरों की पहचान एक दंपति के रूप में हुई जिनका नाता पाकिस्तान से था. शुरुआती जांच बताती है कि दंपति का संपर्क इस्लामिक स्टेट से था. ओबामा ने अपने भाषण में इस पर कहा, "आईसिल या जो भी आतंकवादी संगठन हमें नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेगा, हम उसे तबाह कर देंगे. हम सिर्फ बात नहीं करेंगे, ना ही उसूलों में उलझेंगे और ना डर कर हार मानेंगे."

ओबामा ने कहा कि दो बेटियों के पिता होने के नाते वे सैन बेरनार्डीनो या पेरिस के पीड़ितों का दर्द समझ सकते हैं. देशवासियों को भरोसा दिलाते हुए उन्होंने कहा, "मैं चाहता हूं कि आप लोग यह बात जान लें कि आतंकवाद का डर असली है लेकिन हम इसे हरा देंगे." उन्होंने कहा कि आतंकी हमलों की योजना बनाने वाले जहां भी, जिस भी देश में होंगे, अमेरिकी सेना उन्हें मार गिराएगी. लेकिन इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इस्लामिक स्टेट से लड़ने के लिए थल सेना को नहीं भेजा जाएगा, "हम इराक या फिर सीरिया की जमीन पर एक महंगे युद्ध में नहीं उलझेंगे क्योंकि यही तो आईसिल जैसे संगठन चाहते हैं, वे जानते हैं कि वे हमें युद्ध भूमि पर नहीं हरा सकते हैं."

देश में आतंकवाद को फैलने से रोकने पर ओबामा ने कहा, "हम एक दूसरे के खिलाफ नहीं हो सकते, हम इसे अमेरिका की इस्लाम से जंग का नाम नहीं दे सकते, यह भी उन्हीं बातों में से एक है, जो आईसिल जैसे संगठन चाहते हैं. आईसिल इस्लाम का प्रतिनिधित्व नहीं करता, वे लोग ठग हैं और हत्यारे हैं." ओबामा ने देश में हथियारों को ले कर बेहतर कानून बनाने की बात भी की. हालांकि ओबामा पूरी स्पीच के दौरान एकजुटता की अपील करते रहे, लेकिन उनका यह भाषण आलोचकों का मन नहीं जीत पाया. अगले साल होने वाले चुनाव के लिए राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जॉर्ज पताकी ने ट्वीट किया, "9/11 के बाद अमेरिका पर हुए सबसे बड़े आतंकवादी हमले पर एक बकवास प्रतिक्रिया."

ओबामा ने के-1 वीसा की प्रक्रिया की जांच के भी आदेश दिए हैं. इस वीसा के तहत गैर अमेरिकी लोग अमेरिका में अपने मंगेतर से शादी के लिए आ सकते हैं और वहां बस सकते हैं. 2014 में 36,000 के-1 वीसा दिए गए. हमलावर तशफीन मलिक भी इसी वीसा के चलते सऊदी अरब से अमेरिका आई थी. वह पाकिस्तान की रहने वाली थी. तशफीन का पति सईद फारूक पाकिस्तानी मूल का अमेरिकी था.

आईबी/एमजे (रॉयटर्स, एएफपी)

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