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दुनिया

इस्राएल में नेतन्याहू की लिकुद विजयी

इस्राएली संसदीय चुनावों में प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतन्याहू की सत्ताधारी लिकुद पार्टी ने जीत दर्ज की है. बुधवार को आए नतीजे साफ दिखाते हैं कि जनता ने राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर नेतन्याहू के विचारों का साथ दिया है.

इस बार इस्राएल के संसदीय चुनावों में आखिर तक किसी भी पक्ष की जीत तय नहीं दिख रही थी. बीते छह सालों से सत्ता में रही लिकुद पार्टी के नेता और प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने ही इन मध्यावधि चुनावों का रास्ता साफ किया था. परिणाम दिखाते हैं कि लिकुद को कुल 120 सीटों में से 30 पर जीत हासिल हुई है. इस आंकड़े के साथ वे दक्षिणपंथी पार्टियों और कुछ धार्मिक सहयोगियों के साथ साझेदारी वाली सरकार बनाने की स्थिति में आ गए हैं.

इन चुनावों को मोटे तौर पर नेतन्याहू के नाम पर मिली जीत माना जा रहा है. हालांकि कई चुनावपूर्व सर्वेक्षणों में उनके भविष्य पर संकट की आशंका जताई गई थी. इन सर्वेक्षणों में नेतन्याहू के प्रमुख प्रतिद्वंदी माने जा रहे जायनवादी मोर्चे के नेता इत्साक हैर्त्सोग को उनसे थोड़ा आगे दिखाया जा रहा था. एक्जिट पोल के नतीजों को झुठलाते हुए असल नतीजों में हैर्त्सोग की पार्टी को केवल 24 सीटों से संतोष करना पड़ा.

नेतन्याहू ने अपने चुनाव प्रचार अभियान में सुरक्षा मुद्दों को केन्द्र में रखा था जबकि उनके प्रतिद्वंदियों ने देश में बढ़ती महंगाई को सबसे बड़ा मुद्दा बनाया. विपक्षी पार्टियों ने नेतन्याहू पर आरोप लगाया कि वह देश की जनता की रोजमर्रा की परेशानियां नहीं समझते और उनके हितों से दूर हो गए हैं.

Israelischer Politiker Moshe Kahlon / Mosche Kachlon

मोशे काहलोन और कुलानु पार्टी के अन्य नेता

नेतन्याहू के चौथी बार देश की सत्ता की बागडोर संभालने से मध्यपूर्व के देशों में शांति स्थापित करने के प्रयासों को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है. इसके अलावा अमेरिका के साथ चली आ रही तनातनी भी बढ़ सकती है. ओबामा के साथ काफी संवेदनशील हो चुके अपने संबंधों की पृष्ठभूमि में नेतन्याहू ने चुनावी अभियान के आखिरी दिनों में अंतरराष्ट्रीय समुदाय को पसंद ना आने वाले अपने कट्टर दक्षिणपंथी तेवर दिखाए. एक बेहद नाटकीय नीतिगत उलटफेर करते हुए नेतन्याहू ने ये भी कह डाला कि वे एक फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना के खिलाफ हैं. फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना का मुद्दा केवल व्हाइट हाउस ही नहीं बल्कि एक बड़े अंतरराष्ट्रीय समुदाय का नीतिगत लक्ष्य रहा है. नेतन्याहू ने तो आगे यह भी कह डाला कि वे पूर्वी येरूशलम के यहूदी इलाके में निर्माण कार्य को बढ़ावा देने पर भी ध्यान देंगे. यह वही क्षेत्र है जिसे फिलिस्तीनी लोग अपनी राजधानी मानते हैं.

अब भी सरकार बनाने के लिए नेतन्याहू को मोशे काहलोन के समर्थन की जरूरत है, जिनकी नवोदित कुलानु पार्टी ने इन चुनावों में 10 सीटों पर कब्जा किया है. कुलानु दल ने अपना पूरा चुनाव प्रचार अभियान खाद्य सुरक्षा जैसे आर्थिक मुद्दों पर ही केन्द्रित रखा था. नई सरकार को समर्थन देने वाले काहलोन को देश का अगला वित्त मंत्री बनाया जा सकता है.

आरआर/एमजे (एपी)

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