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दुनिया

इस्राएल ने होटल गिराने पर आलोचना ठुकराई

इस्राएल सरकार ने पूर्वी यरूशलम में विवादास्पद यहूदी बस्ती योजना की अंतरराष्ट्रीय आलोचना ठुकरा दी है. यूरोपीय संघ, अमेरिकी, मिस्र और जॉर्डन ने ऐतिहासिक शेफर्ड होटल की इमारत को गिराने के लिए इस्राएल की आलोचना की थी.

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सोमवार को इस्राएली विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने अंतरराष्ट्रीय आलोचना को ठुकराते हुए कहा कि गिराया जाने वाला शेफर्ड होटल एक निजी जमीन पर स्थित है जिसका इस्तेमाल कूटनीतिक सौदेबाजी का हिस्सा नहीं है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इगाल पाल्मोर ने समाचार एजेंसी एएफपी से कहा कि यह समझ में आने वाली बात नहीं है कि व्यक्तिगत कानून को अंतरराष्ट्रीय कानून और राजनीति के साथ मिलाया जा रहा है.

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प्रवक्ता ने यूरोपीय संघ की विदेश नीति दूत कैथरीन ऐशटन के बयान पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यरूशलम को उपनिवेश कहना शहर के इतिहास का अपमान है. ऐशटन ने रविवार को कहा था कि इस्राएल के कब्जे वाले फलीस्तीनी क्षेत्र में बस्ती बनाना अंतरराष्ट्रीय कानून के हिसाब से अवैध है.

इस्राएल ने रविवार को शहर के फलीस्तीनी हिस्से शेख जराह में सांकेतिक महत्व की इमारत को ढाहने का काम शुरु किया ताकि वहां यहूदी बाशिंदों के लिए 20 लक्जरी अपार्टमेंट बनाए जा सकें. अमेरिकी करोड़पति इर्विंग मॉस्कोवित्स के धन से बनने वाली इस परियोजना की अनुमति मार्च में दी गई थी.

सोमवार सुबह आबू धाबी पहुंचने पर अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने कहा कि पुराने होटल को गिराया जाना दो राज्यों वाले समाधान के शांति प्रयासों को नुकसान पहुंचा रहा है. फलीस्तीनी स्वायत्त प्रशासन के प्रवक्ता नबील अबु रुदैना ने कहा कि होटल गिराए जाने ने इस्राएल के साथ शांति वार्ता फिर से शुरू करने की सारी संभावनाओं पर पानी फेर दिया है.

मिस्र के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि इस्राएल द्वारा बस्ती निर्माण जारी रखने से फलीस्तीनी क्षेत्रों में और हिंसा भड़क सकती है. उधर जॉर्डन के विदेश मंत्री नसर जवदेह ने कहा कि ऐतिहासिक इमारत को गिराने से और अस्थिरता फैलेगी.

भूतपूर्व शेफर्ड होटल शहर के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखता है. आरंभ में वह येरूशलेम के मुख्य मुफ्ती अमीन अल हुसैनी के परिवार के पास था. 1945 से उसमें होटल था. 1967 में छह दिवसीय युद्ध के बाद उसमें इस्राएली सीमा टुकड़ी का मुख्यालय बना दिया गया. इस्राएल ने 1967 में अरब आबादी वाले पूर्वी यरूशलम पर कब्जा कर लिया और पूरे शहर को अपनी राजधानी घोषित कर दिया, लेकिन उसे कभी अंतरराष्ट्रीय मान्यता नहीं मिली.

रिपोर्ट: एजेंसियां/महेश झा

संपादन: वी कुमार

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