इस्राएल ने युद्ध विराम समझौता स्वीकारा | दुनिया | DW | 15.07.2014
  1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

दुनिया

इस्राएल ने युद्ध विराम समझौता स्वीकारा

इस्राएल मिस्र के गाजा युद्ध विराम प्रस्ताव से सहमत हो गया है, लेकिन हमास के हथियारबंद धड़े ने मिस्र की पेशकश ठुकरा दी है. जर्मन विदेश मंत्री श्टाइनमायर इस्राएली और फलस्तीनी नेताओं से मिल रहे हैं..

इस्राएली अधिकारियों के मुताबिक प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतन्याहू की सुरक्षा परिषद इस्राएली सैन्य मुख्यालय में हुए मतदान में मिस्र के प्रस्ताव पर सहमत हो गई है.

इससे पहले गाजा और इस्राएल में शांति स्थापित करने के लिए काम कर रहे अरब देशों के मंत्रियों ने अपील की थी कि गाजा में संघर्ष विराम के लिए सभी धड़े साथ आएं. उनकी मांग थी, "सभी पार्टियां मिस्र की पहल को स्वीकार करें और उसकी शर्तें माने."

मिस्र ने गाजा में मंगलवार सुबह छह बजे से संघर्ष विराम का प्रस्ताव रखा था जिसमें जमीनी और हवाई हमले बंद करने और लोगों सहित सामान के आने जाने पर लगी रोक खत्म करने की मांग की गई थी. इसके बाद काहिरा में इस्राएल और फलीस्तीन के उच्च स्तरीय प्रतिनिधि मंडल अप्रत्यक्ष बातचीत कर सकेंगे. संघर्ष विराम एक सप्ताह रहेगा. इस्राएल ने पहले से ही इस प्रस्ताव का स्वागत किया था लेकिन हमास इसे संदेह की नजरों से देख रहा है. उसका कहना है कि काहिरा ने उससे इस बारे में कोई बात नहीं की है. हमास के हथियारबंद धड़े ने कहा है कि हमले और आक्रामक और तेज होंगे. छह बजे से पहले फलीस्तीनी राकेट इस्राएल की ओर दागे गए. जिसमें किसी जान माल की हानि के समाचार नहीं हैं.

इस्राएल ने दावा किया उसने गाजा में 25 जगहों पर बम फेंके. फलीस्तीनी अधिकारियों के मुताबिक 63 साल का पुरुष और 52 साल की महिला मारी गई. गाजा में कुल मारे गए लोगों की संख्या 182 से ज्यादा हो गई है.

गाजा में नुकसान

दो साल के सबसे बुरे संघर्ष में गाजा ने इस्राएल पर राकेट बहुत दागे लेकिन डोम मिसाइल रोधी सिस्टम के कारण उन्हें जान माल की बड़ी हानि नहीं हुई. हालांकि बार बार हमलों और साइरनों के कारण आम जनजीवन जरूर अस्त व्यस्त हो गया है. उधर हमास ने मांग की है कि शांति विराम के साथ ही गाजा की नाकेबंदी खत्म की जाए और इस्राएल 2012 के संघर्ष विराम के प्रति फिर से प्रतिबद्धता जताए. इतना ही नहीं वह यह भी चाहता है कि मिस्र रफाह सीमा पर ढील दे.

फलीस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने अप्रैल में हमास के साथ मिलकर राष्ट्रीय सरकार बनाई थी. अब्बास ने भी मिस्र के प्रस्ताव का स्वागत किया है. फलीस्तीन की सरकारी समाचार एजेंसी वाफा के मुताबिक राष्ट्रपति ने अपील की है कि सभी धड़े इसे स्वीकार करें. मंगलवार को ही अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी मिस्र के नेताओं से मध्यपूर्व में शांति के लिए बात कर रहे हैं. वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने सोमवार शाम को आने वाले संघर्ष विराम को सकारात्मक बताते हुए उम्मीद जताई कि मिस्र के प्रस्ताव से शांति बहाल होगी.

इधर जर्मनी के विदेश मंत्री फ्रांक-वाल्टर श्टाइनमायर मंगलवार को विवाद सुलझाने के लिए इस्राएली और फलीस्तीनी नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं. इस्राएल में वे प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतान्याहू और विदेश मंत्री अविग्डोर लीबरमन के साथा बात करेंगे जबकि रमल्लाह में फलीस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास से मिलेंगे. एसपीडी पार्टी में विदेश नीति, रक्षा और मानवाधिकार के मामले के उपप्रमुख रोल्फ मुत्सेनिष का कहना है, "इस समय सफल मध्यस्थता के लिए मौके अच्छे नहीं हैं क्योंकि हम विवाद में पड़े धड़ों से सीधे संपर्क नहीं कर सकते. इसके अलावा वो जनता की कीमत पर संघर्ष को और आक्रामक बना रहे हैं."

एएम/एमजे (रॉयटर्स, डीपीए)

DW.COM

संबंधित सामग्री