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खेल

इस्तांबुल ओलंपिक पर सवाल

भले ही दिखने में सात साल लग रहे हों और अभी बीच का ब्राजीली ओलंपिक बाकी हो, लेकिन 2020 ओलंपिक के लिए तुर्की की मेजबानी खतरे में दिखने लगी है. एक तरफ सरकार विरोधी प्रदर्शन और दूसरी तरफ डोपिंग में फंसते तुर्क खिलाड़ी.

"हालांकि मेजबानी के दावे के दौरान ऐसी बातें होती रहत हैं", हसन अरत ऐसा ही मानते हैं. वह मेजबानी का दावा करने वाली तुर्क टीम के प्रमुख हैं. अगले महीने ओलंपिक समिति में इस बात का फैसला होना है कि 2020 के ओलंपिक की मेजबानी किस देश को दी जाए और तुर्की का नंबर सबसे आगे चल रहा है.

अगर तुर्की के इस्तांबुल शहर को इसकी मेजबानी मिलती है, तो वह ओलंपिक कराने वाला पहला मुस्लिम राष्ट्र बन जाएगा. अरत का कहना है, "मैं तो कहता हूं कि प्रदर्शन और डोपिंग के जो मामले सामने आए हैं, उनसे हमें फायदा ही पहुंचेगा. प्रदर्शन खत्म हो चुके हैं. कोई समस्या नहीं बची है और वैसे भी तुर्की की यह बुनियादी समस्या नहीं है. जहां तक ड्रग्स की बात है, हम सफाई कर रहे हैं और हमरा उद्देश्य है कि हम इसमें किसी तरह की गंदगी बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं. तुर्की में डोपिंग करने वालों के लिए यह एक साफ संदेश है."

सितंबर में अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स में तय किया जाएगा कि 2020 ओलंपिक की मेजबानी किस देश को दी जाए. तुर्की के अलावा स्पेन का मैड्रिड शहर और जापान का टोक्यो भी इस रेस में शामिल है.

जून में तुर्की में सरकार के खिलाफ जबरदस्त प्रदर्शन हुए और उस दौरान सुरक्षा बलों को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े और प्रदर्शनकारियों पर पानी की बौछार करनी पड़ी. लगभग दो हफ्तों के इस प्रदर्शन में चार लोगों की मौत हो गई, जबकि 7500 लोग घायल हुए. इसके बाद से ही सवाल उठने लगे कि क्या इस तरह प्रदर्शन कर रहे देश में ओलंपिक हो सकता है.

इससे पहले ब्राजील में भी प्रदर्शन हुए हैं, जहां अगले साल विश्व कप फुटबॉल और उसके बाद 2016 में ओलंपिक होना है. आयोजकों ने वहां भी सरकार विरोधी प्रदर्शन को लेकर चिंता जताई है. ऐसे में वे नहीं चाहेंगे कि लगातार ऐसे देशों को मेजबानी मिले, जहां घरेलू स्थिति नियंत्रण में नहीं है.

तुर्की का मामला इसलिए भी अलग है क्योंकि वह सीरिया का पड़ोसी देश है, जहां पिछले ढाई साल से राजनीतिक अफरा तफरी मची है. हालांकि अरत इस चिंता को बेबुनियाद बताते हैं, "अभी लंबा सफर बाकी है. तीन साल की तैयारी और कुल मिला कर सात साल का समय. ऊपर नीचे तो लगा रहता है. यह आम बात है."

पिछले हफ्ते तुर्क एथलेटिक्स अधिकारियों ने डोपिंग की वजह से 31 तुर्क एथलीटों पर पाबंदी लगा दी. इसके बाद जहां तुर्क प्रशासन पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं खेल अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने बेहतर टेस्टिंग पद्धति अपनाई है, जिससे उन्हें मदद मिल रही है.

तुर्की की असली अल्पतेकिन शक के घेरे में हैं और उन्हें फौरी तौर पर निलंबित कर दिया गया है. पिछले साल लंदन ओलंपिक में 1500 मीटर का स्वर्ण पदक जीतने वाली अल्पतेकिन पहले भी डोपिंग की वजह से दो साल का प्रतिबंध झेल चुकी हैं. 100 मीटर बाधा दौड़ के दोहरे यूरोपीय चैंपियन नेवीन यानित को भी पाबंदी वाली दवा लेने का दोषी पाया गया है.

अरत का कहना है, "जहां तक डोपिंग का सवाल है, हम युवा पीढ़ी को सिखा रहे हैं." उनका कहना है कि तुर्की की 3 करोड़ आबादी 25 साल से कम उम्र की है और उनका कहना है कि इससे इस तबके को फायदा पहुंचेगा, "जरूरी बात यह है कि हम संघर्ष कर रहे हैं और हमें इसका फायदा मिल रहा है. अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक संघ से हमें अच्छी प्रतिक्रिया मिली है."

पिछले छह बार में इस्तांबुल पांचवीं बार ओलंपिक की मेजबानी की कोशिश कर रहा है. अगर उसे इसका मौका मिलता है, तो पहली बार ओलंपिक में एशिया और यूरोप में एक साथ खेल आयोजित हो सकेंगे. तुर्की का लगभग 97 प्रतिशत हिस्सा एशिया में आता है, जबकि वह यूरोपीय अधिकार भी रखना चाहता है.

एजेए/एनआर

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