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विज्ञान

इसी साल बाजार में आएगी पर्सनल फ्लाइंग मशीन

इंसान को उड़ाने वाली पर्सनल फ्लाइंग मशीन 2017 के अंत तक बाजार में आ जाएगी. इसे उड़ाने के लिए दो घंटे की ट्रेनिंग की जरूरत पड़ेगी.

अमेरिका की सिलिकन वैली की स्टार्ट अप कंपनी किटी हॉक ने एक बयान जारी कर कहा है, "हमारा मिशन निजी उड़ान के सपने को हकीकत में बदलना है. हम हर किसी को निजी उड़ान भरने का मौका देने पर विश्वास करते हैं. आज एलान करते हैं कि हमारी पर्सनल फ्लाइंग मशीन 2017 के आखिर तक बाजार में उपलब्ध होगी.”

यह पर्सनल फ्लाइंग मशीन असल में एक बड़ा ड्रोन है. इसमें आठ रोटर लगे हैं, जो मशीन को 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ाएंगे. फ्लाइंग मशीन हेलिकॉप्टर की तरह सीधे ऊपर की तरफ उड़ान भरेगी. लैंडिंग भी वर्टिकल होगी. कंपनी के मुताबिक मशीन का वजन 100 किलोग्राम होगा.

किटी हॉक कंपनी का दफ्तर कैलीफोर्निया में गूगल के मुख्यालय माउंट व्यू में ही है. फ्लाइंग कार या फ्लाइंग मशीन बनाने वाली कंपनी की पीठ गूगल ने भी थपथपाई है. गूगल के सह संस्थापक लैरी पेज ने सोमवार को फ्लाइंग मशीन के प्रोटोटाइप का वीडियो भी रिलीज किया. 

किटी हॉक के मुताबिक पर्सनल फ्लाइंग मशीनें पूरी तरह इलेक्ट्रिक होंगी. कंपनी के मुताबिक उनकी मशीनें अमेरिका के अल्ट्रालाइट एयरक्रॉफ्ट रेगुलेशन के तहत आएंगी. इन फ्लाइंग मशीनों को प्रशासन भी सुरक्षित करार दे चुका है. इनके कई टेस्ट भी हो चुके हैं. खुले इलाकों में इन्हें उड़ाने की कानूनन इजाजत भी मिल चुकी है. फ्लाइंग मशीन को उड़ान के लिए किसी तरह के पायलट लाइसेंस की जरूरत नहीं होगी. कंपनी का दावा है कि दो घंटे की ट्रेनिंग के बाद लोग इन्हें उड़ा सकेंगे.

पर्सनल फ्लाइंग मशीनें अमेरिका और जर्मनी समेत कई और देशों में विकसित की जा रही है. तकनीकी विश्लेषकों के मुताबिक फ्लाइंग मशीनें भविष्य का परिवहन माध्यम हैं.

(ड्रोन में उड़ेगा इंसान)

ओएसजे/एमजे (एपी)

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