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दुनिया

इसीलिए जरूरी है नेट निरपेक्षता

भारत में नेट निरपेक्षता राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गई है. मोदी सरकार को कॉरपोरेट समर्थक दिखाने के लिए बुधवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस मुद्दे को संसद में उठाया.

भारत जैसे युवा देश में नेट निरपेक्षता का मतलब नेट के इस्तेमाल की आजादी भी है. पिछले समय में कुछ कंपनियों ने व्हाट्स ऐप, स्काइप या वाइबर जैसी सेवाओं के लिए ग्राहकों से फीस लेने की बाद कह कर इस बहस को और हवा दे दी थी. इस बीच नेट न्यूट्रैलिटी सोशल मीडिया पर आंदोलन का रूप लेता जा रहा है.

सोशल मीडिया पर 'इंटरनेट बचाओ' आंदोलन छिड़ा है और नेट निरपेक्षता के समर्थन में कार्टून शेयर किए जा रहे हैं.

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा इस मुद्दे को संसद में उठाए जाने के बाद कार्टून युद्ध में राहुल गांधी को भी शामिल कर लिया गया है.

सत्ताधारी बीजेपी की ईकाईयां सोशल मीडिया पर नहीं दिखने वाले कांग्रेसी नेता पर कटाक्ष करने से बाज नहीं आ रहे.

लेकिन दूसरी ओर प्रधानमंत्री को उनके भाषणों का हवाला देकर नेट निरपेक्षता की जरूरत पर जोर भी दिया जा रहा है.

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