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मंथन

इलेक्ट्रो मोबिलिटी की ओर बर्लिन

2020 तक जर्मन सरकार दस लाख इलेक्ट्रिक कारें सड़कों पर लाना चाहती है. ये कारें तभी पर्यावरण को फायदा पहुंचा सकती हैं जब इनके लिए इस्तेमाल की जाने वाली बिजली भी वैकल्पिक ऊर्जा साधनों से आ रही हो.

बर्लिन में ऑयरेफ कैंपस में एक स्मार्ट ग्रिड सिस्टम लगा हुआ है. यह एक ऐसा इंटेलीजेंट इलेक्ट्रिक नेट है, जो जर्मनी में इलेक्ट्रो मोबिलिटी को और कुशल बनाएगा. ऑयरेफ कैंपस में इस स्मार्ट ग्रिड के लिए इनोज कंपनी के फ्रांक क्रिस्टियान हिनरिष 2011 से जिम्मेदार हैं. प्रोजेक्ट को डेवलप किए जाने के बारे में वह बताते हैं, "हमारा लक्ष्य है इसे महंगा नहीं होने देना. यह नहीं कि भले ही जो लागत आए इसे ग्रीन होना चाहिए, बल्कि हमें यह देखना होगा कि इंटेलीजेंस ऐसा बने कि औद्योगिक उत्पाद और बिजनेस मॉडल में ढ़लने लायक मिक्स संभव हो."

स्मार्ट ग्रिड सिस्टम के जरिए बिजली बनाने वाले, स्टोर, उपभोक्ता और इलेक्ट्रिक कारें उत्पादन की क्षमता और खपत पर जानकारी का आदान प्रदान कर सकेंगे. इसी के जरिए ऊर्जा की खपत और वैकल्पिक ऊर्जा की सप्लाई में मेल बिठाया जा सकेगा. फ्रांक बताते हैं, "मुझे फिर से इस्तेमाल होने वाली ऊर्जा कैसे मिले, जो हर समय न तो उसी क्वालिटी में और न मात्रा में मिलती है. इसे इस तरह ऑफर किया जाए कि वह हमेशा इस्तेमाल हो सके और पारंपरिक ऊर्जा लेने की कम से कम जरूरत पड़े. और यही हल है कि फैले हुए लोग संगठित हों और स्थानीय ऊर्जा का इस्तेमाल करें."

Deutschland Gewalt in Berlin Bahnhof Alexanderplatz

स्मार्ट ग्रिड जैसे कई प्रोजेक्ट से बर्लिन भविष्य में मोबिलिटी पर शोध पर जोर दे रहा है.

मूलभूत संरचना की कमी

बर्लिन के ज्यूडक्रॉयत्स स्टेशन पर ऐसा ही करने की योजना है. सौर और पवन ऊर्जा से जुड़ा स्मार्ट ग्रिड सिस्टम 2014 से जर्मन ट्रेन की मोबिलिटी बढ़ाएगा. ये सुविधा इलेक्ट्रिक कारों के लिए और इलेक्ट्रिक साइकिलों, दोनों के लिए है. बर्लिन के इस ट्रेन स्टेशन पर हर दिन करीब एक लाख यात्री आते हैं. राइनर लेमोइने इंस्टीट्यूट के डिलन मैके इसे कुछ ऐसे समझाते हैं, "इस इंटेलीजेंट मोबिलिटी स्टेशन में लोगों के लिए सुविधा होगी कि वह स्मार्ट फोन पर हर ऑफर देख सकें कि उनके लिए बेहतर क्या है, उसकी कीमत क्या होगी. या फिर वे कहां जाना चाहते हैं और वहां कैसे जा सकते हैं. और ये सारी सुविधाएं वैकल्पिक ऊर्जा के इस्तेमाल से मिल रही हैं."

लेकिन मूलभूत संरचना की अभी कमी है. अभी तक बर्लिन में सिर्फ 1,200 इलेक्ट्रिक कारें हैं. लेकिन उम्मीद है कि इसमें जल्द ही बदलाव आएगा. क्योंकि इंटेलीजेंट इलेक्ट्रिक नेट में इलेक्ट्रिक कारों के बिना कुछ नहीं होगा. ईएमओ बर्लिन के उप प्रमुख थोमस माइसनर बताते हैं, "नवीनीकृत ऊर्जा के ज्यादा इस्तेमाल से जुड़ा हुआ है इसे जमा करने की संभावना भी बनाना. और बैटरी के जरिए इस नेट से जुड़ी हुई इलेक्ट्रिक कारें इस ऊर्जा को जमा करने का सबसे बढ़िया साधन हैं. कुल मिला कर संभव है कि अतिरिक्त सौर और पवन ऊर्जा को कार की बैटरी में सेव किया जा सकता है."

स्मार्ट ग्रिड जैसे कई प्रोजेक्ट से बर्लिन भविष्य में मोबिलिटी पर शोध पर जोर दे रहा है. इसके जरिए वह इलेक्ट्रो मोबिलिटी में यूरोप का मेट्रो शहर बन पाएगा या नहीं, यह तो समय ही बताएगा.

रिपोर्टः आर नुगराहा/आभा मोंढे

संपादनः ईशा भाटिया

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