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दुनिया

"इरोम ने खुदकुशी का प्रयास किया"

बारह साल से अनशन कर रही इरोम शर्मिला पर दिल्ली की अदालत ने खुदकुशी की कोशिश के आरोप तय कर दिए हैं, जिसके जवाब में शर्मिला ने कहा कि वह जीवन से प्यार करती हैं. दिल्ली की अदालत में पेशी के दौरान शर्मिला सिसक पड़ीं.

दिल्ली में मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट आकाश जैन ने 40 साल की शर्मिला पर आरोप तय करते हुए कहा कि उन पर धारा 309 के तहत मुकदमा चलाया जाएगा. इससे पहले मजिस्ट्रेट ने पूछा कि क्या वह अपना अपराध स्वीकार करती हैं, तो शर्मिला रो पड़ीं और कहा, "नहीं, मैं खुदकुशी नहीं करना चाहती हूं. मेरा प्रदर्शन अहिंसक है. मैं इंसानों की तरह जीना चाहती हूं."

भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में विवादित सशस्त्र सैन्य विशेषाधिकार कानून यानी एएफएसपीए लागू किए जाने के विरोध में अनशन कर रही हैं. लगभग एक दशक से उन्हें नाक की नली से जबरन खाना दिया जा रहा है.

इसी सिलसिले में उन्होंने 2006 में दिल्ली के जंतर मंतर पर भी अनशन किया था, जिसके बाद उन पर खुदकुशी के प्रयास के आरोप लगे. भारतीय दंड संहिता के मुताबिक खुदकुशी की कोशिश दंडनीय अपराध है और दोष साबित होने पर एक साल तक की सजा हो सकती है. अदालत में जब यह मामला चल रहा था, तो परिसर के बाहर नारेबाजी हो रही थी. मजिस्ट्रेट ने कहा कि वह शर्मिला का सम्मान करते हैं लेकिन उन पर खुदकुशी की कोशिश के आरोप हैं और पहली नजर में यह सही लगते हैं. इसके बाद उन्होंने पूछा कि क्या वह अपना अपराध स्वीकार करती हैं, शर्मिला ने कहा, नहीं. इसके बाद जज ने कहा, "मैं आपका सम्मान करता हूं लेकिन इस देश का कानून आपको अपनी जान लेने की अनुमति नहीं देता."

चलेगा मुकदमा

शर्मिला के इनकार के बाद मामले को 22 मई तक के लिए टाल दिया गया है. आगे सरकारी पक्ष और बचाव पक्ष की दलीलें सुनी जाएंगी. इस बीच इरोम शर्मिला ने अपने वकील से सलाह मशविरे के बाद कहा कि अगर सरकार एएफएसपीए को हटाने का फैसला करे, तो वह अपनी नली निकाल फेंकेंगी. अदालत ने कहा कि यह राजनीतिक फैसला है और वह सिर्फ इस मामले की सुनवाई कर रही है.

भारत के पूर्वोत्तर सीमावर्ती राज्यों अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड और त्रिपुरा में कई दशकों से यह कानून लगा है, जिसमें सशस्त्र बलों को बहुत ज्यादा अधिकार दिए गए हैं. बाद में जम्मू कश्मीर में भी इस कानून को लागू कर दिया गया.

कौन हैं इरोम

मणिपुर के एक सरकारी कर्मचारी की बेटी इरोम शर्मिला ने मणिपुर में 10 लोगों की हत्या के विरोध में अनशन शुरू किया. आरोप है कि भारतीय सेना के जवानों ने 2 नवंबर, 2000 में इन लोगों की हत्या की. इसके दो दिन बाद इरोम ने विवादित एएफएसपीए कानून के खिलाफ अनशन शुरू किया. उनकी हालत बिगड़ने के बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया. लेकिन शर्मिला ने कुछ भी खाने या पीने से इनकार कर दिया. इसके बाद जबरन उनके नाक में नली लगा दी गई, जिससे उन्हें खाना दिया जाता है.

शर्मिला को हर साल खुदकुशी के प्रयास में गिरफ्तार किया जाता है और बाद में छोड़ दिया जाता है.

तीन चार साल में शर्मिला पूरी दुनिया में लोकप्रिय हो गईं और उन्हें मणिपुर की "लौह महिला" कहा जाने लगा. महात्मा गांधी को अपना आदर्श मानने वाली शर्मिला 2006 में राज घाट गईं और उसके बाद जंतर मंतर पर अपना अनशन शुरू कर दिया. बाद में पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया और उन्हें एम्स ले जाया गया, जहां से उन्होंने प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को चिट्ठी लिखी.

अंतरराष्ट्रीय आकर्षण

नोबेल पुरस्कार विजेता शीरीं इबादी ने भी शर्मिला से मुलाकात की है और उनके मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र तक पहुंचाने का वादा किया है. शर्मिला ने सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे को भी पूर्वोत्तर भारत में बुलाया था, जिसके बाद हजारे ने अपने प्रतिनिधियों को शर्मिला के पास भेजा. एशियाई मानवाधिकार आयोग और रबींद्रनाथ टैगोर शांति पुरस्कार के अलावा शर्मिला को कई और मानवाधिकार संगठनों से पुरस्कृत किया जा चुका है.

एजेए/ओएसजे (पीटीआई)

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