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दुनिया

इरास्मुस में शिक्षा, प्यार और बच्चे

स्टूडेंट एक्सचेंज के इरास्मुस प्रोग्राम ने यूरोप को दस लाख से ज्यादा बच्चे दिए हैं. यूरोप में छात्रों के आदान प्रदान के इस 27 साल पुराने प्रोग्राम के एक चौथाई भागीदार विदेश में पढ़ाई के दौरान अपने मौजूदा पार्टनर से मिले.

यूरोपीय संघ ने एक बयान में कहा है कि इरास्मुस प्रोग्राम में हिस्सा लेने वाले तीन छात्रों में से एक का दूसरे देश के पार्टनर से प्रेम हो गया. यह पढ़ाई के लिए अपने देश में रह जाने वाले लोगों का तीनगुना है. यूरोपीय संघ के सर्वे ने बहुराष्ट्रीय रिसर्चरों के बीच ढेर सारे प्यार और स्नेह के सबूत दिए हैं. एक दूसरे से मेलजोल और नए रिश्तों के बनने से एक तरह का बेबी बूम पैदा हो गया है. शिक्षा के लिए जिम्मेदार यूरोपीय संघ की कमिसार आंद्रूला वासिलियू ने कहा कि यूरोपीय संघ का "अनुमान है कि 1987 से इरास्मुस दम्पत्तियों को करीब 10 लाख बच्चे हुए हैं."

यूरोपीय संघ के अधिकारियों का कहना है कि इरास्मुस स्टूडेंट एक्सचेंज प्रोग्राम की उपलब्धियां द्विराष्ट्रीय बच्चे पैदा करने से कहीं अधिक हैं. उसकी वजह से बहुत सारी नौकरियां भी पैदा हुई हैं. आर्थिक मंदी की वजह से यूरोप में पांच युवा लोगों में से एक बेरोजगार है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि इरास्मुस प्रोग्राम में भाग लेने वाले छात्रों की रोजगार पाने की संभावना बढ़ जाती है, "हम प्रोग्राम के असर पर हुए अध्ययनों में देख सकते हैं कि इरास्मुस कार्यक्रम का हिस्सा रहे युवा लोगों की लंबे समय तक बेरोजगार रहने की संभावना कम है."

यूरोपीय आयोग की प्रवक्ता पिया आरेनकिल्डे हानसेन कहती हैं, "युवा लोगों के लिए विदेशों में जाना और वहां रहना और यदि चाहते हों तो बहुत सारी संभावनाओं के लिए खुलना बहुत बड़ा आकर्षण है." इरास्मुस दम्पतियों को हुए दस लाख बच्चों को वे भावनात्मक आंकड़ा बताते हुए कहती हैं कि यह दिखाता है कि यह प्रोग्राम कैसे सकारात्मक नतीजे दे रहा है.

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पूर्व इरास्मुस स्कॉलर मोगेरिनी

इरास्मुस पीढ़ी

इरास्मुस प्रोग्राम के तहत स्कॉलरशिप पाने वाले 40 फीसदी छात्र ग्रेजुएशन के बाद दूसरे देशों में पढ़ने चले गए, जबकि 23 फीसदी अपने देशों में ही रह गए. सर्वे के लिए 34 देशों में 75,000 छात्रों और आयोजकों से पूछताछ की गई. यह एक्सचेंज प्रोग्राम हॉलैंड के दार्शनिक देसीदेरिउस इरास्मुस के नाम पर बनाया गया है. वे मानवीय सोच के प्रचार के लिए पुनर्जागरण काल में यूरोप के देशों में घूमा करते थे. इस कार्यक्रम में यूरोपीय संघ के 28 देशों के अलावा आइसलैंड, लिष्टेनश्टाइन, नॉर्वे, स्विट्जरलैंड और तुर्की शामिल हैं.

इटली की विदेश मंत्री और यूरोपीय संघ की मनोनीत विदेशनैतिक दूत फेडेरिका मोगेरिनी भी इरास्मुस कार्यक्रम में हिस्सा ले चुकी हैं. इटली के प्रधानमंत्री माटेओ रेंजी उन्हें इरास्मुस पीढ़ी का बताते हैं. मोगेरिनी ने फ्रांस के एक्सों प्रावांस में इरास्मुस एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत इस्लाम और राजनीति पर अपनी थिसिस लिखी. अब तक 30 लाख छात्रों और साढ़े तीन लाख शिक्षकों ने इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया है. यूरोपीय संघ के अगले बजट के दौरान 2020 तक और 40 लाख छात्रों को स्कॉलरशिप मिलेगी.

एमजे/आईबी (एएफपी, डीपीए)

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