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जर्मन चुनाव

इराक पर लगे प्रतिबंध हटे

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने देश पर लगे वे प्रतिबंध हटा लिए हैं जो सद्दाम हुसैन के शासन के दौरान लगाए गए थे. इराक की तरफ से व्यापक नरसंहार के हथियार बनाने की आशंका के बाद ये प्रतिबंध लगाए गए थे.

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यह भी इराक है

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने इराक पर हथियारों के सिलसिले में लगाए गए प्रतिबंधों को हटा लिया है. अब इराक को नागरिक परमाणु कार्यक्रम चलाने की इजाजत दे दी गई है. यह एक सांकेतिक कदम है ताकि देश को 1990 में कुवैत हमले के बाद से चली आ रही स्थिति से बाहर निकालकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर खड़ा किया जा सके.

इराक का संविधान देश को व्यापक नरसंहार के हथियार रखने की इजाजत नहीं देता. और देश परमाणु, रासायनिक और जैव हथियारों और मिसाइलों के बारे में की गई संधियों का भी सदस्य है.

सुरक्षा परिषद ने इराक के तेल और प्राकृतिक गैस से होने वाली आमदनी पर भी इराक को अधिकार देने के बारे में वोटिंग की. इस प्रस्ताव के तहत 30 जून 2011 से देश को अपने संसाधनों पर अधिकार वापस मिल जाएगा. साथ ही तेल के बदले अनाज कार्यक्रम की बची हुई गतिविधियों को खत्म करने का भी फैसला किया गया. यह कार्यक्रम 1996 से 2003 के बीच चलाया गया ताकि इराक को प्रतिबंधों का सामना करने में मदद मिल सके.

इस महीने अमेरिका सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता कर रहा है और उसी ने एक उच्च स्तरीय बैठक में तीन नए प्रस्ताव पारित करने पर जोर डाला. यह बैठक अमेरिकी उप राष्ट्रपति जो बाइडेन की अध्यक्षता में हुई. बाइडेन ने इन कदमों को इराक के लिए मील के अहम पत्थर बताया. उन्होंने कहा, "हमने जो तीन प्रस्ताव पास किए हैं वे सद्दाम हुसैन के काले युग के बोझ को खत्म करेंगे. हाल के सालों में इराकी लोग जातीय हिंसा से बाहर आए हैं. उन्होंने अतिवादियों के हाथों में अपना भविष्य सौंपने से इनकार कर दिया है. उन्होंने अच्छे भविष्य का हक पा लिया है."

इराक में एक दिन पहले ही नई सरकार बनाने में आ रहे अवरोध खत्म हुए हैं. एक साल बाद संयुक्त राष्ट्र भी अपनी सारी सेनाएं वहां से हटा लेगा.

संयुक्त राष्ट्र के इन कदमों को इराक ने ऐतिहासिक बताया है. विदेश मंत्री होशियार जेबारी ने कहा कि सुरक्षा परिषद की बैठक एक ऐतिहासिक सत्र था और अब वे सारे प्रतिबंध खत्म हो गए हैं जो सद्दाम हुसैन द्वारा शुरू किए गए युद्ध की वजह से लगाए गए.

रिपोर्टः एजेंसियां/वी कुमार

संपादनः ए कुमार

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