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दुनिया

इराकी शहर पर अल कायदा का कब्जा

इराकी सेना फलूजा शहर पर दोबारा कब्जे के लिए सैनिक कार्रवाई की तैयारी कर रही है, जबकि अमेरिका और ईरान ने इराक को मदद की पेशकश की है. शहर पर अल कायदा ने कब्जा जमा लिया है.

इराक के अनबार प्रांत में प्रशासन को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, जहां सुन्नी बहुल इलाकों में अल कायदा ने प्रभुत्व जमा लिया है. उन्होंने फलूजा और रामादी शहरों पर कब्जा कर लिया है और सीरिया की सीमा पर भी विद्रोहियों से भिड़ गए हैं. लगभग तीन साल पुराने सीरियाई युद्ध में एक और मुश्किल आ खड़ी हुई है.

अमेरिकी सेना नहीं

इराकी सेना इन इलाकों पर दोबारा कब्जा करने की कोशिश कर रही है. अमेरिका ने कहा है कि वह इराकी सेना की मदद करेगा. विदेश मंत्री जॉन केरी ने कहा कि वह इन घटनाओं से चिंतित हैं, "हमें बहुत, बहुत चिंता है कि अल कायदा और इससे जुड़ा आईएसआईएल न सिर्फ इराक में, बल्कि सीरिया में भी पैर पसारने की कोशिश कर रहे हैं." हालांकि अमेरिका ने साफ कर दिया है कि वह अपनी सेनाओं को दोबारा इराक नहीं भेजेगा. 2011 में अमेरिकी सेना ने इराक खाली कर दिया था. केरी का कहना है, "यह इराकियों की जंग है. हम अपने बूटों को उस धरती पर दोबारा नहीं उतारेंगे."

अल कायदा के इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड लेवांट (आईएसआईएल) ने पिछले कुछ महीनों में अपनी शक्ति बढ़ाई है. उसकी कोशिश है कि सीरिया की सीमा पर एक सुन्नी राज्य स्थापित किया जाए. बरसों में यह पहला मौका है, जब सुन्नी लड़ाकों ने फलूजा और रामादी जैसे अहम शहरों पर कब्जा कर लिया है. इससे पहले 2006 में अल कायदा को पराजित करने के लिए इराकी सेना ने अमेरिका से खास मदद ली थी. उस लड़ाई में कबायली नेताओं ने भी साथ दिया था. सरकारी अधिकारी एक बार फिर अनबार प्रांत में कबायली नेताओं से मिल कर उनसे समर्थन पाने की कोशिश कर रहे हैं. प्रांतीय परिषद के सदस्य फाहिल ईसा का कहना है, "स्थानीय सरकार के नाते हम कोशिश कर रहे हैं कि फलूजा में सेना न भेजी जाए. हम शहर के बाहर कबायली लोगों से बातचीत कर रहे हैं कि किस तरह शहर में घुसा जाए और सेना को भी शामिल न किया जाए." वे लोगों को भी शहर छोड़ कर जाने को कह रहे हैं.

ईरान भी मदद को तैयार

इस बीच, तेहरान ने कहा है कि वह इराक को "सैनिक हथियार या परामर्श" देने के लिए तैयार है. तानसिम समाचार एजेंसी ने ब्रिगेडियर जनरल मुहम्मद हेजाजी के हवाले से यह रिपोर्ट दी है. उन्होंने कहा है कि हालांकि वह समझते हैं कि इराक को ईरानी सेना की जरूरत नहीं होगी.

पश्चिम में सीरियाई सीमा के पास अल कायदा लड़ाकों ने अपनी मौजूदगी तेज कर दी है, जिससे इराकी सेना का ध्यान दो तरफ बंट गया है. बहुत साफ नहीं हो पा रहा है कि इराकी अल कायदा लड़ाके और सीरियाई विद्रोहियों के बीच किस तरह का रिश्ता है. हालांकि दोनों सुन्नी समुदायों के हैं लेकिन समझा जा रहा है कि उनके बीच भी टकराव हो रहा है. इराक का कहना है कि सीरियाई विद्रोही सीमा पार करके उनके क्षेत्रों में हिंसा फैला रहे हैं.

अमेरिकी समाचार एजेंसी एपी का कहना है कि शुक्रवार को दोनों पक्षों के बीच तेज झड़पें शुरू हो गईं, जिससे सीरिया की जंग ने एक नया मोड़ ले लिया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि आम तौर पर इराकी अल कायदा सीरिया के विद्रोहियों की मदद करता आया है. लेकिन पिछले कुछ महीनों में, खास तौर पर उत्तरी सीरिया में, अल कायदा के लड़ाके कब्जा करना चाहते हैं. सीरिया के इन जगहों पर विद्रोही बहुत मजबूत नहीं हैं और ज्यादातर विदेशी लड़ाके मोर्चा संभाले हुए हैं.

एजेए/एमजे (डीपीए, रॉयटर्स, एपी, एएफपी)

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