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दुनिया

इराकी चुनाव में मलिकी का भविष्य

पिछले आठ साल में इराक की पहचान खून खराबे और प्रधानमंत्री नूरी अल मलिकी से होती आई है. पीएम मलिकी तीसरी बार अपने लिए वोट मांग रहे हैं.

वह लोगों में ये साबित करने की कोशिश कर रहे हैं वह उनके साथ खड़े हैं. पिछले हफ्ते अपने एक भाषण में उन्होंने जिक्र किया, "ये जो दफ्तरों के बाहर खड़े हैं, वे बुरी तरह परेशान हो रहे हैं. दफ्तर के अंदर एयर कंडीशन कमरों में बैठे लोगों को उनके बारे में चिंता नहीं होती."

मलिकी 2006 से इराक के प्रधानमंत्री हैं और इस दौर में वहां जबरदस्त हिंसा हुई है. फिर भी वह इस चुनाव में सबसे आगे चल रहे हैं. उनके विपक्षी एकजुट नहीं हो पाए हैं और इसका फायदा मलिकी को मिल रहा है. अल कायदा के नेतृत्व में सुन्नी चरमपंथियों का गुट राजधानी के करीब पहुंच रहा है और शिया उग्रवादी देश के सुरक्षा बल के साथ मिल कर सुन्नी समुदाय से बदला लेने की कोशिश करते हैं. इनके बीच मलिकी जो भी सुलह संधि की कोशिश करते हैं, वह टूट जाती है.

Irak Kämpfe Miliz Fallujah 15.03.2014

हिंसा से परेशान इराक

इराक यानि हिंसा

सिर्फ मार्च के महीने में बगदाद में 180 लोग मारे गए और 477 घायल हुए. इस साल अब तक इराक में करीब 2000 लोगों की जान हिंसा में जा चुकी है.

मलिकी आम तौर पर दीवारों के पीछे से सुरक्षा कवच में भाषण देते हैं. इस बार वह कह रहे हैं कि सबसे ज्यादा मुश्किल लगातार हमलों से हो रही है, जो "उनके खिलाफ साजिश" है. हाल के दिनों में इराक में एक बार फिर से हिंसा बढ़ी है. उन्होंने प्रधानमंत्री रहते हुए रक्षा, गृह और सुरक्षा के मंत्रालय अपने पास रखे हैं, जो उन्हें देश का सबसे शक्तिशाली आदमी बनाता है. अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने पिछले साल सुन्नी उग्रवादियों के खिलाफ भारी भरकम अभियान चलाया था.

लेकिन उनकी शक्ति की वजह से शिया, सुन्नी और कुर्द सभी तबकों में उनके दुश्मन भी तैयार हो गए हैं और उनका कहना है कि वे मलिकी के खिलाफ संघर्ष में मजहबी भेद भाव से ऊपर उठेंगे.

अनबार में संघर्ष

मलिकी अब अनबार प्रांत में लोगों को बताते हैं कि वे सुन्नी चरमपंथियों से उन्हें बचाना चाहते हैं, तो दूसरी जगह पड़ोसी सीरिया के शियाओं से भी सुरक्षा देने का दावा करते हैं. उनके भाषणों में जबरदस्त अंतर्विरोध है. पिछले चुनाव के दौरान 2010 में उन्होंने धर्मनिरपेक्षता की बात कही थी, जो इस बार के भाषणों में नजर नहीं आ रही है. पिछले चुनाव के कुछ दिन बाद अमेरिकी सेना ने इराक छोड़ दिया था.

मलिकी ने पिछले महीने एक सभा में कहा कि अनबार प्रांत में चल रहे संघर्ष को कम करके आंका जा रहा है. इराकी सुरक्षा में लगे लोगों का कहना है कि वहां 1000 से ज्यादा शिया लड़ाके मारे जा चुके हैं और हजारों ने सेना छोड़ दी है. शिया सैनिकों का कहना है कि उनका नेतृत्व मदद नहीं कर रहा है. मलिकी ने कहा, "यह कितने दुख की बात है कि जिस समय हमारी सेना इन हत्यारों और अपराधियों का मुकाबला कर रही है, उसी समय कुछ नेता उनकी पीठ में छुरा भोंक रहे हैं."

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