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विज्ञान

इबोला मरीजों के लिए बेड नहीं

आने वाले हफ्तों में इबोला के ढेरों नए मामले सामने आने की आशंका है. अमेरिका ने पीड़ित पश्चिम अफ्रीकी देशों को सैन्य और आर्थिक मदद देने की बात कही है. लेकिन जानकारों का कहना है यह काफी नहीं है.

लाइबेरिया में स्थिति की जांच कर रहे विश्व स्वास्थ्य संगठन की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक नए मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. लेकिन एक बड़ी समस्या है अस्पतालों में नए मरीजों के लिए बेड की कमी. कई मरीजों को इलाज के बगैर घर वापस लौटना पड़ रहा है.

रिपोर्ट के अनुसार, "इबोला से प्रभावित सभी देशों में से लाइबेरिया में सबसे ज्यादा पीड़ित और इबोला से मौत के मामले हैं." लाइबेरिया में अब तक इबोला वायरस से संक्रमित लगभग 2,000 मामले दर्ज हुए हैं और 1,000 से ज्यादा की मृत्यु हो गई. डब्ल्यूएचओ के मुताबिक पश्चिम अफ्रीका के इबोला से प्रभावित इलाकों में इस वायरस से मरने वालों की दर 58 फीसदी है.

जर्मनी के रॉबर्ट कोख इंस्टीट्यूट के रिसर्चर माक्सिमिलयान गैर्टलर मानते हैं कि हालात किसी आपदा से कम नहीं. जर्मनी के एक टीवी कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि आने वाले समय में और मामले सामने आएंगे. उन्होंने कहा, "अब तक की संख्या देखते हुए, पहले के मुकाबले इस बार इबोला का सबसे बड़ा हमला है."

विदेशी मदद

अमेरिका ने एलान किया है कि वह पश्चिम अफ्रीकी देशों को सैन्य मदद भेजेगा. सरकारी स्वास्थ्य कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए भी इंतजाम मुहैया कराए जाएंगे. इबोला से प्रभावित इलाकों में लोगों में गुस्सा और घबराहट है. डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स संस्था अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिकित्सकीय मदद की अपील कर रही है. गैर्टलर डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स के निदेशक भी हैं. गैर्टलर ने कहा कि वह राष्ट्रपति ओबामा के प्रयास की सराहना करते हैं.

उनके मुताबकि सिर्फ लाइबेरिया की राजधानी मोनरोविया के अस्पतालों में ही करीब 1,000 बेड की जरूरत है. उन्होंने यह भी कहा कि स्वास्थ्य केंद्रों पर सैन्य सुरक्षा व्यवस्था की कोई जरूरत नहीं है. इसके बजाय इलाज के लिए अलग दूर दराज केंद्रों की स्थापना करना ज्यादा मददगार साबित हो सकता है.

अस्पतालों की कमी

डब्ल्यूएचओ की जांच के मुताबिक लाइबेरिया में अब किसी भी अस्पताल में और आने वाले मरीजों के लिए खाली बेड उपलब्ध नहीं हैं. "मोनरेविया में कई परिवार मरीज को अपने साथ टैक्सी में लिए एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल बेड की तलाश में भटक रहे हैं. कहीं बेड खाली नहीं हैं."

मोनरोविया में इबोला सेंटर पर डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स के संयोजक स्टीफन लिलयेग्रेन ने बताया, "हर रोज हमें मरीजों को लौटाना पड़ता है क्योंकि हमारे पास उन्हें रखने की जगह ही नहीं है." ऐसे में मरीज घर लौट जाते हैं जहां उनसे परिवार के दूसरे लोग भी संक्रमित हो जाते हैं. इस तरह वायरस का फैलना रुकने का नाम नहीं ले रहा. हालांकि इबोला वायरस हवा के जरिए नहीं पैलता यह सीधे संपर्क से एक से दूसरे इंसान में जाता है. यानि यह फ्लू जैसा संक्रामक नहीं है.

रिपोर्ट: ओस्टेराथ ब्रिगिटे/एसएफ

संपादन: आभा मोंढे

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