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दुनिया

इबोला की दवा पर विवाद

स्पेन का कहना है कि घातक इबोला बीमारी से प्रभावित एक पादरी के लिए उसे अमेरिका से वह दवा मिली है, जो बहुत दुर्लभ है. इससे पहले दुनिया भर में कहा जा चुका है कि इस बीमारी से निपटने के लिए मोटे तौर पर कोई भी दवा नहीं है.

स्पेन के स्वास्थ्य मंत्रालय से जारी बयान से कुछ ही दिन पहले अमेरिका ने कहा था कि उसके दो डॉक्टरों को यह दवा दी गई है लेकिन यह पर्याप्त मात्रा में नहीं है. दवा बनाने वाली कंपनी सैन डियागो की मैप फार्मासूटिकल का कहना है कि यह दवा बहुत कम मात्रा में उपलब्ध है और वह सरकारी एजेंसियों के साथ मिल कर इसका प्रोडक्शन बढ़ाने की कोशिश कर रही है.

नाइजीरिया के अधिकारियों का कहना है कि वे अमेरिकी स्वास्थ्य अधिकारियों से मिल कर इबोला की दवा की मांग कर रहे हैं लेकिन उन्हें यह नहीं मिल पा रही है. इबोला का कोई पक्का इलाज नहीं है, जिसकी वजह से लगभग 1000 लोगों की मौत हो चुकी है. ज्यादातर मौतें पश्चिम अफ्रीकी महाद्वीप में हुई हैं. समझा जाता है कि इस साल मार्च में यह बीमारी गिनी में शुरू हुई और लाइबेरिया, सियेरा लियोन और नाइजीरिया तक फैल चुकी है. इसे लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एहतियात बरती जा रही है.

इस बीच इबोला की दवा की नैतिकता को लेकर दुनिया भर के जानकारों में चर्चा हुई है. सोमवार को एक बयान जारी कर स्पेन के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि उन्हें कंपनी की इजाजत के साथ जेनेवा से जेडमैप नाम की दवा मिली है. इसे मैड्रिड लाया गया है ताकि मिगुएल पायारेस का इलाज किया जा सके. 75 साल के पादरी पायारेस को लाइबेरिया से लाया गया है और उन्हें एक अस्पताल में अलग थलग करके रखा गया है.

Symbolbild - Ebola in Liberia

लाइबेरिया में इबोला का कहर

इससे पहले दो अमेरिकियों को भी लाइबेरिया में यह बीमारी हुई और उन्हें अमेरिका ले जाकर यह दवा दी गई. इनमें से एक डॉक्टर केंट ब्रैंटली ने पिछले हफ्ते कहा है कि उनकी सेहत बेहतर हुई है. उनके साथ एक राहतकर्मी महिला को भी यह दवा दी गई है और उनकी हालत भी बेहतर है.

अब यह साफ नहीं हो पा रहा है कि जब इस दवा की इतनी किल्लत है तो स्पेन को यह कैसे मिली. उसका कहना है कि जो प्रयोगशाला इस दवा पर काम कर रही है, उसे वहीं से दवा की इजाजत मिली है. उसका कहना है कि इसके लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन और डॉक्टर्स विदाउट बोर्डर्स के बीच एक समझौते को आधार बनाया गया है. यह दवा जेनेवा से लाई गई है, जहां इसकी एक डोज मौजूद थी.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रवक्ता ग्रेगरी हार्टेल का कहना है कि स्पेन को मदद करने में संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी की कोई भूमिका नहीं है.

इस दवा को लेकर एक अफ्रीकी देश ने भी दिलचस्पी दिखाई है. नाइजीरिया के स्वास्थ्य मंत्री ओनयेनबुची चुकवू ने पिछले हफ्ते कहा कि वह यह दवा चाहते हैं लेकिन उन्हें जवाब मिला कि इसके लिए निर्माता की रजामंदी जरूरी है. यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेन्शन के डॉक्टर टॉम फ्रीडेन का कहना है कि सही मायने में इस दवा का कोई भी डोज उपलब्ध नहीं है.

जेडमैप दवा का इंसानों पर कभी भी टेस्ट नहीं किया गया है और वैज्ञानिकों का कहना है कि दावे के साथ नहीं कहा जा सकता है कि इसी दवा ने दोनों अमेरिकियों को फायदा पहुंचाया है. इस दवा में तीन एंटीबॉडी दवाओं का मिश्रण है. यह इबोला से संक्रमित कोशिकाओं का पता लगाती है और प्रतिरोधी प्रणाली उन कोशिकाओं को मार सकती है.

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