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दुनिया

इबोला का प्रयोगात्मक टीका 'सुरक्षित'

अमेरिका में नई इबोला वैक्सीन के शुरुआती परीक्षण में इस टीके के प्रभावी और सुरक्षित होने के संकेत मिले हैं. वैज्ञानिकों ने इस टीके का 20 वयस्कों पर परीक्षण किया.

अमेरिका की राष्ट्रीय एलर्जी और संक्रामक बीमारी संस्थान (एनआईएआईडी) ने ऑनलाइन फोरम पर पुष्टि करते हुए कहा, "नए टीके के प्रति शरीर ने अच्छी प्रतिक्रिया दी और सभी 20 स्वस्थ वयस्कों के शरीर में (इबोला के प्रति) प्रतिरोधी क्षमता भी दिखाई दी."

एनआईएआईडी के रिसर्चरों ने यह परीक्षण किया और इसके बारे में न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में पेपर प्रकाशित किया. जिस तरह का प्रतिरोध देखने को मिला उसे बीमारी से प्रभावी सुरक्षा की श्रेणी में रखा जा सकता है.

इबोला के पहले टीके का परीक्षण अमेरिका में किया गया और इसे एनआईएआईडी और दवा निर्माता कंपनी ग्लैक्सो स्मिथ क्लाइन ने मिल कर विकसित किया है. इसमें चिपांजी का संवर्धित कोल्ड वायरस इस्तेमाल किया जाता है जिसके सिरे पर इबोला प्रोटीन लगा होता है ताकि जिस शरीर में यह जाए उसमें इबोला से लड़ने के लिए एंटीबॉडी पैदा करे.

परीक्षण में शामिल किसी भी व्यक्ति में कोई गंभीर साइड इफेक्ट देखने को नहीं मिले. हालांकि दो लोगों को इंजेक्शन लगाने के 24 घंटे के बाद हल्का सा बुखार हुआ. वैक्सीन में इबोला की दोनों प्रजातियों का इस्तेमाल किया गया है, पश्चिमी अफ्रीका में फैली प्रजाति जायरे और सूडान इबोला.

एनआईएआईडी के प्रमुख एंथनी फॉसी ने कहा कि विकसित की जा रही वैक्सीन "इस महामारी को रोकने में अहम भूमिका निभा सकती है और निसंदेह आने वाले समय में संक्रमण को रोकने में भी महत्वपूर्ण साबित होगी. इंसानों पर किए गए परीक्षण से मिले सकारात्मक नतीजों के आधार पर हम बड़े स्तर पर परीक्षण की योजना बना रहे हैं ताकि पता चले कि क्या वैक्सीन इबोला संक्रमण को रोकने में सक्षम है या नहीं."

हालांकि अभी इसके व्यापक परीक्षण में समय लगेगा. एनआईएआईडी लाइबेरियाई अधिकारियों के साथ सक्रिय बातचीत कर रहा है ताकि टीके की क्षमता और सुरक्षा के बारे में व्यापक जानकारी मिल सके.

सितंबर में परीक्षण शुरू किया गया था. टीका लगने के चार हफ्ते में ही उनके शरीर में एंटीबॉडी बननी शुरू हो गई थीं. अमेरिकी स्वास्थ्य संस्थान ने बताया कि जिन 10 लोगों को ज्यादा क्षमता वाला डोज दिया गया था उनमें एंडीबॉडी भी ऊंचे स्तर की बनीं उनके शरीर में एक प्रतिरोधी कोशिका सीडी8 टी बनी जो कि बीमारी से लड़ने में अहम भूमिका अदा करती है. परीक्षण की मुख्य जांचकर्ता जूली लेजरवुड ने कहा, "जानवरों पर किए गए पहले के शोधों से हम जानते हैं कि उनमें सीडी8 टी कोशिकाएं बीमारी से सुरक्षा में अहम भूमिका निभाती हैं."

दुनिया भर में इबोला की दवा पर रिसर्च तेज हुई है जिसका कारण पश्चिमी अफ्रीका में फैला इबोला का संक्रमण है. इस संक्रमण के कारण अब तक 5,549 लोगों की जान जा चुकी है. लाइबेरिया और गिनी में संक्रमण कम हुआ है लेकिन सिएरा लियोन में अभी भी यह फैल रहा है.

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