इनकी नाक तोड़ दो: चीनी सेना | दुनिया | DW | 01.08.2016
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दुनिया

इनकी नाक तोड़ दो: चीनी सेना

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग पर अमेरिका के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने का दबाव डाला जा रहा है. चीनी सेना के एक धड़े को लगता है कि दक्षिण चीन सागर विवाद में अब दुश्मनों की नाक तोड़ने का समय आ गया है.

दक्षिण चीन सागर विवाद में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का फैसला चीन के खिलाफ आया. द हेग की अदालत के इंटरनेशनल ट्राइब्यूनल ने 12 जुलाई को फिलीपींस के दावे को सही करार देते हुए चीन से कहा कि दक्षिण चीन सागर और उसके द्वीपों पर सिर्फ बीजिंग का ही हक नहीं है. चीन अपने तट से बेहद दूर दूसरे देशों के करीब बसे द्वीपों पर अपना दावा करता रहा है. ट्राइब्यूनल ने नौ लाइनें खींचते हुए अलग अलग देशों के सागर में इकोनॉमिक टेरेटोरियल जोन तय कर दिये. चीन फैसले को खारिज कर चुका है. फैसले के बाद से ही चीन में राष्ट्रवाद की भावना उफान मार रही है. सरकारी मीडिया में कड़े भाषा में संपादकीय लिखे जा रहे हैं.

बीते सालों में चीन ने दक्षिण चीन सागर में दूसरे देशों के मछुआरों की नावों को धमकाकर कर वापस भी भेजा. कुछ विवादित द्वीपों पर तो उसने सेना भी तैनात कर दी. विवाद बढ़ने के बाद जब अमेरिकी नौसेना के जंगी जहाजों ने वहां चक्कर लगाए तो बीजिंग का रुख कुछ नरम पड़ा. वॉशिंगटन का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय कानून मुफ्त सागर में आवाजाही की आजादी देता है जबकि बीजिंग, दक्षिण चीन सागर को मुक्त सागर के बजाए अपना इलाका कहता है.

(उपग्रह चित्र देखकर अनुमान लगाया जा रहा है कि दक्षिण चीन सागर की विवादित जल सीमा में उभरते जमीन के टुकड़े चीन के सैनिक ठिकाने हो सकते हैं. हैरान करने वाली तस्वीरें.)

अमेरिकी नौसेना के दखल के बाद बीजिंग लगातार चेतावनी देता रहा है. लेकिन अब चीनी सेना के एक हिस्से को लग रहा है कि कड़े कदम उठाने चाहिए. समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने चीनी सेना के चार बड़े अधिकारियों से बातचीत के बाद यह रिपोर्ट दी है. सेना से जुड़े एक सूत्र ने कहा, "द पीपल्स लिबरेशन आर्मी तैयार है. हमें जाना चाहिए और 1979 में वियतनाम युद्ध के दौरान जिस तरह डेंग शियाओपिंग ने उनकी नाक तोड़ी थी वैसा ही जबाव देना चाहिए."

सेना से जुड़े एक और अधिकारी ने कहा, "अमेरिका वही करेगा जो वह करना चाहता है. हम वह करेंगे तो हमें करना है. पूरी सेना सख्त हुई है." सेना के कई अधिकारी अमेरिका और इलाके में उसके सहयोगियों को हथियारों से सीमित जबाव देने का दबाव डाल रहे हैं. सेना, सरकार से दक्षिण चीन सागर में एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन जोन बनाने को भी कह रही है. ऐसा हुआ तो वहां से गुजरने वाले यात्री विमानों को भी चीन प्रशासन से अनुमति लेनी होगी. लेकिन द हेग के फैसले के बाद चीन ने अगर ऐसा किया तो विवाद का गंभीर होना तय है.

वहीं, राष्ट्रपति शी जिनपिंग फिलहाल अर्थव्यवस्था पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं. 2008 की विश्वव्यापी मंदी के बाद से ही चीन का आर्थिक विकास धीमा पड़ा है. राष्ट्रपति का कहना है कि बाहरी माहौल बेहतर होगा तो इकोनॉमी पटरी पर लौट आएगी. चीन में सितंबर में जी20 देशों की शिखर सम्मेलन भी है. माना जा रहा है कि उस दौरान भी दक्षिण चीन सागर को मुद्दा गर्माएगा.

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