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ताना बाना

इतिहास में आज:1 जुलाई

आज भारत की उस बेटी का जन्मदिन है जो पहली बार तारों को छू कर आई. नासा के जरिए अंतरिक्ष तक जाने वाली कल्पना चावला के पहले भारत की बेटियां तारों को नानी दादी की कहानियों और कल्पनाओं में ही छूती थीं.

1961 में आज ही के दिन करनाल की धरती पर वो परी उतरी जिसने भारत की आंखों में सपनों को हकीकत में बदलने का साहस भर दिया. कल्पना को पैदा कर ना सिर्फ करनाल बल्कि पूरे भारत का सिर गौरव से ऊंचा हो गया जब 1997 में पहली बार वो नासा के मिशन पर अंतरिक्ष में गईं. कल्पना ने 1988 में ही अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के साथ काम करना शुरू कर दिया था. इसके बाद 2003 में दोबारा उन्हें 16 दिन के अंतरिक्ष मिशन के लिए चुना गया. दोनों यात्राओं को मिल कर कल्पना ने 30 दिन, 14 घंटे और 54 मिनट अंतरिक्ष में बिताए. पहली यात्रा में उनके यान ने पृथ्वी के 352 चक्कर लगाए. दूसरी बार साथी अंतरिक्ष यात्रियों के साथ 16 दिनों तक रातों दिन काम में जुटे रह कर कल्पना मिशन को पूरा करती रहीं. इस दौरान इन लोगों ने करीब 80 प्रयोग किए.

मिशन पूरा कर वापस लौटते समय धरती पर पहुंचने से ठीक 16 मिनट पहले तक सब कुछ ठीक था. कामयाबी की उमंगों पर सवार कोलंबिया बड़ी बेताबी से नीचे आ रहा था, अचानक पृथ्वी के वायुमंडल में घुसने के दौरान घर्षण से आग लगी और सब कुछ राख, भारत ने बेटी गंवाई, दुनिया ने अंतरिक्ष मिशन, नासा ने कोलंबिया और इतिहास ने सुनहरा दिन. 1 फरवरी 2003 को भारत जल्दी जग गया. तारों की दुनिया को छू कर आने वाली उसकी पहली बेटी वापस धरती पर नहीं लौटेगी यह जान कर भला कैसे सोया रह सकता था. आधी रात में ही उसे उठा कर बता दिया गया, इस सुबह में उजाला नहीं.

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