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ताना बाना

इतिहास में आज: 6 सितंबर

रूस के दूसरे सबसे बड़े शहर को कभी सेंट पीटर्सबर्ग, कभी पेत्रोग्राद तो कभी लेनिनग्राद बुलाया गया. जानते हैं क्यों और कैसे बदलते रहे इस शहर के नाम?

रूस के पश्चिमी तटवर्ती इलाके में बसा यह शहर देश के सबसे बड़े बंदरगाह और खूबसूरत वास्तु के लिए मशहूर है. सेंट पीटर्सबर्ग के नाम से विख्यात यह शहर 1991 तक लेनिनग्राद के नाम से जाना जाता था. समय समय पर इस शहर का नाम बदलना रूस के इतिहास की उथल पुथल की तरफ भी इशारा करता है. आज ही के दिन 1991 में शहर को अपना पुराना नाम सेंट पीटर्सबर्ग वापस मिला था.

सेंट पीटर्सबर्ग की खोज 1703 में यूरोपीय शासक पीटर प्रथम ने की थी. पहली बार शहर का जर्मन नाम सेंट पीटर्सबर्ग रखने वाले खुद पीटर थे. 1712 से 1918 तक जार शासन काल में सेंट पीटर्सबर्ग ही रूस की राजधानी था. सेंट पीटर्सबर्ग का अर्थ होता है सेंट पीटर का किला. क्योंकि यह शहर रूस की राजधानी था इसलिए इसके लिए जरूरी था कि नाम जर्मन से ज्यादा रूसी लगे. पीटर का सम्मान भी जरूरी था, इसलिए 31 अगस्त 1914 को शहर का नाम बदल कर पेत्रोग्राद कर दिया गया जिसका मतलब है पीटर का शहर.

1917 में फरवरी से अक्टूबर के बीच पेत्रोग्राद रूसी क्रांति का गढ़ रहा. 1918 में मॉस्को को रूस की राजधानी बना दिया गया. 1924 में रूस के क्रांतिकारी नेता लेनिन की मृत्यु पर उनके सम्मान में शहर नाम बदल कर लेनिनग्राद कर दिया गया. हालांकि रूस में कई लोग शहर के कम्युनिस्ट नाम से सहमत नहीं थे. यही वजह थी कि 6 सितंबर 1991 को इसे दोबारा बदल कर सेंट पीटर्सबर्ग कर दिया गया.

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