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ताना बाना

इतिहास में आज: 6 जनवरी

1838 में आज ही के दिन सैमुएल मोरसे पहली बार दुनिया के सामने टेलीग्राफ तकनीक को लाए थे, जो भविष्य में दूरसंचार का आधार साबित हुआ.

मोरसे ने अपना टेलीग्राफ सिस्टम अमेरिका के न्यू जर्सी में पेश किया. इस यंत्र में पहली बार विद्युत आवेशों का इस्तेमाल कोडेड संदेशों को एक तार के रास्ते भेजने में किया गया था. माना जाता है कि यहीं से दूर संचार के क्षेत्र में क्रांति की नींव पड़ी. 1920 और 1930 के दशक में दूरसंचार के साधन काफी लोकप्रिय हुए. मोरसे का जन्म 27 अप्रैल, 1791 को मैसाचुसेट्स में हुआ था. मोरसे ने येल यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की, जहां उन्हें कला और बिजली दोनों में गहरी दिलचस्पी रही. कॉलेज के बाद वह पेंटर बन गए.

1832 में एक बार जब वह समुद्र के रास्ते यूरोप से अमेरिका जा रहे थे, रास्ते में उन्होंने इलेक्ट्रोमैग्नेट नाम के एक नए आविष्कार के बारे में सुना. यहीं से उन्हें इलेक्ट्रिक टेलीग्राफ बनाने का आइडिया आया. इसके बाद कई साल उन्होंने एक प्रोटोटाइप विकसित करने में बिताए. इसमें उनके दो पार्टनर लियोलार्ड गेल और एलफ्रेड वाइल भी मदद कर रहे थे. 1838 में मोरसे ने अपने इस आविष्कार को दुनिया के सामने रखा. इसमें मोरसे कोड यानि डॉट्स और डैशेज अक्षर और अंक को दर्शाते थे. 1843 में मोरसे ने बड़ी मुश्किलों के बाद अमेरिकी कांग्रेस को राजी कराया कि वे उनके इस आविष्कार में पैसे लगाएं. इस तरह अमेरिका में वॉशिंगटन डीसी से बाल्टिमोर के बीच टेलीग्राफ लाइन बिछवाई गई. इसके बाद मई 1844 में मोरसे ने पहला आधिकारिक टेलीग्राम भेजा जिसमें संदेश था: "वाट हैथ गॉड रोट!"

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