1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

ताना बाना

इतिहास में आज: 5 जून

सोवियत संघ के अंतिम राष्ट्रपति मिखाइल गोर्बाचोव को आज ही के दिन नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. सोवियत संघ और शीतयुद्ध के अंत में उनकी बहुत अहम भूमिका रही है.

गोर्बाचोव को पूर्व कम्युनिस्ट देश में पेरेस्त्रोइका और ग्लासनोस्ट के जरिए आर्थिक, सामाजिक और राजनैतिक बदलाव लाने का श्रेय भी दिया जाता है. 1985 में गोर्बाचोव सोवियत संघ की कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव बने. इसके साथ ही उन्होंने सामाजिक और आर्थिक बदलाव के लिए सुधार की दिशा में काम करना शुरू कर दिया. नागरिकों को अपनी बात रखने की आजादी जैसे परिवर्तनों से उन्होंने सोवियत संघ के नागरिकों को हैरान कर दिया. नागरिकों को सोवियत संघ के बाहर आने जाने की छूट देने के अलावा उन्होंने राजनैतिक बंदियों को भी रिहा करने का आदेश दिया.

मिखाइल गोर्बाचोव को जर्मनी के एकीकरण का भी श्रेय जाता है. जर्मन चांसलर हेल्मुट कोल के साथ मिलकर उन्होंने द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद से विभाजित जर्मनी को एक करने में अभूतपूर्व योगदान दिया. इसकी वजह से ही यूरोपीय एकीकरण भी संभव हुआ. उनके इन प्रयासों के लिए गोर्बाचोव को कई दूसरे सम्मानों के अलावा 1990 में आज ही के दिन नोबेल शांति पुरस्कार मिला.

DW.COM