इतिहास में आज: 29 मई | ताना बाना | DW | 28.05.2013
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ताना बाना

इतिहास में आज: 29 मई

पृथ्वीराज कपूर हिन्दी सिनेमा के सबसे पुराने नामों में से एक हैं. 1972 में आज ही के दिन अपने इस कीमती हीरे को कला जगत ने खो दिया था.

फिल्म 'मुग्ल-ए-आजम' के शहंशाह अकबर हों या 'आवारा' के जस्टिस रघुनाथ, 'मंजिल' का सुरेश या फिर कोई और किरदार, हर पात्र को निभाते समय खुद उसी रूप में सहजता से ढल जाना पृथ्वीराज कपूर को बखूबी आता था. कपूर परिवार से सिनेमा में सबसे पहला कदम रखने वाले पृथ्वीराज कपूर फिल्मों और नाटकों की दुनिया में काम करने वाली भारत की कुछ प्रारंभिक और मशहूर हस्तियों में से एक थे. शुरुआत में कुछ मूक फिल्मों में काम करने के बाद उन्होंने पहली आवाज वाली भारतीय फिल्म 'आलम आरा' में भी काम किया.

उनके द्वारा 1942 में शुरू किया गया पृथ्वी थियेटर आज भी कला प्रेमियों के लिए एक अहम स्थान रखता है. 1942 में ही उनके थिएटर समूह ने 'शकुंतला' और 'कालीदास' जैसे नाटक कर अपना लोहा मनवा लिया था. उस समय पृथ्वी समूह भारत भर में जगह जगह जाकर अपने नाटक प्रस्तुत किया करता था. 16 सालों तक उनके नाटक समूह ने करीब 2,662 नाटक किए जिनमें से हर एक में पृथ्वीराज में मुख्य पात्र निभाया. उनके फिल्मों में रहते हुए ही उनके बड़े बेटे राज कपूर ने भी फिल्मों में कदम रखा. उन्होंने भी एक अभिनेता ही नहीं, बल्कि निर्देशक के रूप में अपने लिए एक अलग जगह बनाई. भारतीय सिनेमा के इतिहास में कपूर खानदान की कई पीढ़ियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है.

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