इतिहास में आज: 27 दिसंबर | ताना बाना | DW | 27.12.2013
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ताना बाना

इतिहास में आज: 27 दिसंबर

पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की 2007 में आज ही के दिन रावलपिंडी में हत्या कर दी गई.

21 जून 1953 में जन्मी बेनजीर भुट्टो जुल्फिकार अली भुट्टो की बेटी थीं. पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के संस्थापक जुल्फिकार अली भुट्टो 1973 से 1977 तक पाकिस्तान के प्रधानमंत्री रहे. 1977 में जुल्फिकार अली भुट्टो के तख्तापलट के बाद सेना प्रमुख जनरल जिया उल हक ने उनको बंदी बना लिया और शासन की बागडोर अपने हाथ में ले ली. अपने सहयोगियों की हत्या करवाने के आरोप में 1979 में जुल्फिकार अली भुट्टो को फांसी दे दी गई और इसके बाद बेनजीर को हिरासत में ले लिया गया. 1977 से 1984 के बीच वह कई बार जेल गईं. बाद में वह लंदन जाकर रहने लगीं.

कुछ समय बाद जब बेनजीर पाकिस्तान वापस लौटीं तो टूटी फूटी उर्दू और चाल ढाल में अंग्रेजीयत वाली बेनजीर में लोगों को उम्मीद नजर आई और बहुत थोड़े समय में वो उनकी पसंदीदा नेता बन गईं. बेनजीर भुट्टो 1988 में भारी मतों से चुनाव जीतकर पाकिस्तान की और किसी मुस्लिम देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं. हालांकि इसके बाद 1990 में राष्ट्रपति गुलाम इसहाक खान ने भ्रष्टाचार के आरोप में उन्हें बर्खास्त कर दिया.

1993 में वह फिर चुनाव जीतीं और दोबारा प्रधानमंत्री पद संभाला और 1996 में एक बार फिर भ्रष्टाचार के आरोप में बर्खास्त हुईं. भ्रष्टाचार के आरोपों से जूझ रहीं बेनजीर ने 1999 में पाकिस्तान छोड़ दिया.

इस बीच वह दुबई और लंदन में रहीं. 2007 में वह चुनावों की तैयारियों के लिए फिर पाकिस्तान लौंटी. दो बार सत्ता संभाल चुकी बेनजीर जब तकरीबन आठ साल के निर्वासन के बाद वतन लौटीं तो लगा कि पाकिस्तान की जनता उनकी राहों में फूल बरसाने के लिए तैयार बैठी थी. निर्वासन के लंबे दौर ने भी न तो उनके करिश्मे को कम किया न उनकी पार्टी की ताकत को.

भुट्टो को इस बात का अंदाजा था कि पाकिस्तान वापसी पर उनकी जान को खतरा है. उन्होंने 2007 में एक टीवी साक्षात्कार में भी यह बात कही थी. 27 दिसंबर 2007 को रावलपिंडी में एक चुनावी रैली के बाद उन पर एक आत्मघाती हमला हुआ जिसमें उनकी जान चली गई.

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