इतिहास में आज: 26 जुलाई | ताना बाना | DW | 25.07.2014
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ताना बाना

इतिहास में आज: 26 जुलाई

1953 में आज ही के दिन अधिकारिक रूप से क्यूबा की क्रांति शुरू हुई थी. इसी क्रांति से देश में कम्युनिस्ट क्रांतिकारी फिडेल कास्त्रो ने अमेरिकी समर्थन वाले तानाशाह बातिस्ता का तख्ता पलट कर, लोकतंत्र की बहाली की थी.

फिडेल कास्त्रो एक युवा वकील थे जब 1952 के चुनाव में खड़े होकर उन्होंने तानाशाह के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की. चुनाव में कास्त्रो को सफलता नहीं मिली. इसके बावजूद कास्त्रो ने करीब 130 लोगों को अपने साथ जुटाया और उनके साथ 'मोनकाडा सैनिक छावनियों' को अपने कब्जे में लेने की कोशिश की. हमला नाकामयाब रहा और फिर कास्त्रो समेत सभी क्रांतिकारियों पर मुकदमा चला और कुछ को तो फांसी की सजा सुनाई गई. कास्त्रो पर सरकार को उखाड़ फेंकने की कोशिश का आरोप लगा और उन्हें 15 साल की सजा सुना दी गई.

बाद में बातिस्ता अपनी ताकत को लेकर इतने आश्वस्त हो गए कि उन्होंने सभी नेताओं को माफी दे दी. जेल से निकल कर कास्त्रो अपने भाई राउल कास्त्रो के साथ मेक्सिको चले गए. वहीं चे ग्वेरा के साथ मिलकर कास्त्रो ने 26 जुलाई की क्रांति की शुरुआत की. बातिस्ता के खिलाफ क्यूबा में अंसतोष बढ़ता चला गया. 2 दिसंबर 1956 को कास्त्रो क्यूबा के तट पर हथियार से लैस 81 लोगों के साथ पहुंचे. कास्त्रो ने दक्षिणपंथी तानाशाह फुल्गेन्सियो बातिस्ता के खिलाफ छापामार अभियान चलाया. गुरिल्ला लड़ाई में बातिस्ता की सेना कमजोर होती गई. 1958 आते आते कास्त्रो के लिए क्यूबा में समर्थन काफी बढ़ता गया. तभी बातिस्ता का तख्ता पलट कर, क्यूबा में लोकतंत्र की बहाली का रास्ता साफ हुआ. 1959 में कास्त्रो ने देश के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली और लगभग आधी सदी तक वह क्यूबा के प्रमुख बने रहे.