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ताना बाना

इतिहास में आज: 25 जुलाई

आज ही के दिन 1989 में वेल्स की राजकुमारी डायना ने लंदन में एक एड्स सेंटर का उद्घाटन किया. एड्स के मरीजों के प्रति होने वाले भेदभाव के खिलाफ किसी शाही परिवार के सदस्य के इस तरह सामने आने से दुनिया में एक मिसाल कायम हुई.

लैंडमार्क एड्स सेंटर के उद्घाटन के मौके पर केन्द्र के निदेशक जोनाथन ग्रिमशॉ के साथ बेहद गर्मजोशी के साथ डायना ने हाथ मिलाया था. सामान्य शिष्टाचार जैसी लगने वाली इस हरकत का काफी बड़ा संदेश गया. ग्रिमशॉ खुद पांच साल पहले ही एचआईवी पॉजिटिव पाए गए थे.

राजकुमारी ने करीब एक घंटे का वक्त सेंटर में बिताया था और केन्द्र में दाखिला लेने वाले पहले कुछ मरीजों के साथ चर्चा में भी हिस्सा लिया. मरीजों की परेशानियां सुनने के बाद डायना ने कहा, "मुझे लगता है कि इन्हें जो कुछ झेलना पड़ता है, वह खौफनाक है." राजकुमारी डायना को एड्स के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए 1999 में नेशनल एड्स ट्रस्ट ने पहले 'डायना प्रिसेंज ऑफ वेल्स लेक्चर' का आयोजन किया.

एड्स यानि 'एक्वायर्ड इम्यून डेफीशिएंसी सिंड्रोम' को पहली बार एक बीमारी के तौर पर अमेरिका में मान्यता 1981 में मिली. 1984 के अंत तक केवल ब्रिटेन में ही 108 लोगों के इस बीमारी के शिकार होने और 46 लोगों की मौत होने की पुष्टि हुई. 1985 में स्वास्थ्य विभाग की ओर से एड्स पर जारी किए गए सुझावों का प्रकाशन हुआ. इसके दो सालों के भीतर ही ब्रिटेन की सरकार ने एड्स जागरूकता का एक बहुत बड़ा अभियान शुरू किया, जिसे "डोंट डाई ऑफ इग्नोरेंस" कहा गया. इसके अंतर्गत मिडिलसेक्स हॉस्पिटल में देश के पहले एड्स वॉर्ड का उद्घाटन भी राजकुमारी डायना ने ही किया. वायरस से होने वाली इस जानलेवा बीमारी को दूर करने का आज तक कोई इलाज नहीं मिला है. इस पर नियंत्रण कर सामान्य जीवन जीने के लिए कुछ एंटी रेट्रो वायरल तरीके कारगर साबित हुए हैं.