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ताना बाना

इतिहास में आज: 15 नवंबर

सटासट दाढ़ी बनाने के लिए या पैरों से बाल साफ के लिए आज दुनिया भर में सेफ्टी रेजरों का इस्तेमाल होता है. इन्हीं से जुड़ा है आज का इतिहास.

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15 नवंबर 1905 को किंग कैंप जिलेट को अमेरिकी पेटेंट कार्यालय ने सेफ्टी रेजर का पेटेंट दे दिया. इस तरह दुनिया के सामने पहली बार दोनों तरफ धार वाली शेविंग ब्लेड आई. इससे पहले 1901 में जिलेट ने सेफ्टी रेजर की कंपनी बनाई. तब बाजार में रेजर बनाने वाली दूसरी कंपनियां भी मौजूद थीं. करीब चार साल तक जिलेट प्रतिस्पर्धा की होड़ में फंसा रहा.

लेकिन किंग सी जिलेट की किस्मत 15 नवंबर 1905 को दो तरफ धार वाली शेविंग ब्लेड और उसके सेफ्टी रेजर बदली. यह पहले के मुकाबले हल्का और तेज धार का था. साथ ही सस्ता भी था. जिलेट ने लाखों नए सेफ्टी रेजर बेचे. 1908 में कंपनी ने जर्मनी, फ्रांस, कनाडा और ब्रिटेन में भी फैक्ट्रियां लगा दी. 1915 तक जिलेट सात करोड़ सेफ्टी रेजर बेच चुका था.

1918 में जब अमेरिका प्रथम विश्वयुद्ध में कूदा तो अमेरिकी सरकार ने सभी सैनिकों को एक जिलेट के रेजर सेट मुहैया कराया. यूरोप में कंपनी के नियंत्रण को लेकर फूट भी पड़ी. इसकी वजह से किंग सी जिलेट ने यूरोप की ईकाई को बेच दिया. यूरोपियन यूनिट को जॉयस ने खरीदा, हालांकि नई कंपनी ने जिलेट का ब्रांड नेम नहीं बदला.

किंग सी जिलेट ने हमेशा रिसर्च और प्रोडक्ट को बेहतर बनाने पर जोर दिया. 1929 की विश्वव्यापी मंदी के दौरान रेजर की कीमत कम रखने का दबाव जिलेट कंपनी सहन न कर सकी.

1932 तक जिलेट कंपनी करीब करीब दिवालिया होने की कगार पर पहुंच गई. 9 जुलाई 1932 को 77 साल की उम्र में किंग कैंप जिलेट ने दुनिया को अलविदा कहा. 2005 में अमेरिकी कंपनी प्रॉक्टर एंड गैम्बल ने जिलेट को खरीद लिया. आज जिलेट सेफ्टी रेजर का सबसे बड़ा ब्रांड है.

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